पितरों की मोक्षस्थली गयाजी नगरी में 6 सितंबर से चल रहे 17 दिवसीय त्रिपाक्षिक श्राद्ध कर्म के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। शनिवार को विष्णुपद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में देश-दुनिया से आए लगभग 12 लाख तीर्थयात्री मौजूद रहे। त्रिपाक्षिक गयाजी श्राद्ध के तहत पिंडदानियों ने सोलह वेदियों में से पांच वेदियों—कार्तिकपद, दक्षिणाग्निपद, गार्हपत्याग्निपद, आह्वानीयाग्निपद और सूर्यपद—पर अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। इस दौरान सबसे अधिक भीड़ विष्णुपद मंदिर में रही। पिंडदानियों ने कर्मकांड के बाद विष्णु चरणों के दर्शन और पूजन भी किया।
गयाजी नगरी में त्रिपाक्षिक श्राद्ध कर्म के छठे दिन तक करीब 3 लाख तीर्थयात्रियों द्वारा अपने—अपने पितरों का तर्पण कर लिये जाने का अनुमान है। इनमें कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हैं। इन्हीं प्रमुख हस्तियों में से एक भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुत्री और भाजपा की सांसद बांसुरी स्वराज ने भी अपनी मां सुषमा स्वराज का गयाजी में पिंडदान किया। बांसुरी स्वराज बीते दिन गयाजी पहुंची। विष्णुपद पहुंचकर उन्होंने डेढ़ घंटे तक वैदिक क्रिया पूरी श्रद्धा के साथ पूर्ण की और फिर पिंडदान के सभी विधानों को निभाया। उनके साथ परिवार के अन्य लोग भी लोग पिंडदान करने गयाजी धाम पहुंचे थे। पंडा वैद्यनाथ दाढ़ीवाले ने पुजारी के साथ वैदिक विधि से सुषमा स्वराज का पिंडदान संपादित करवाया।
इस दौरान बांसुरी स्वराज पूरी तरह से धार्मिक कार्यों में लीन थीं। जब उनसे पत्रकारों ने बात करना चाहा तो उन्होंने बस इतना कहा कि यहां धार्मिक काम से आई हूं। यहां पर राजनीति की कोई बात नहीं करूंगी। पूरा ध्यान पूजा पर लगाना चाहती हूं। बांसुरी स्वराज के आने की सूचना पाते ही उनसे मिलने पार्टी के कार्यकर्ता और आम लोग बेताब नजर आए, भाजपा के कई नेता इस अवसर पर मौजूद थे। अपनी मां सुषमा स्वराज का श्राद्ध करते वक्त बांसुरी स्वराज काफी भावुक नजर आईं। इस दौरान उन्होंने पिंड अर्पण भारतीय परिधान में किया। वो स्काई ब्लू साड़ी और कंधे पर गमछी रख कर पूरी विधि से फल्गु और अक्षय वट पिंड वेदी पर पिंड अर्पण करती नजर आईं। गयाजी में इस वर्ष पितृपक्ष के दौरान बांसुरी स्वराज के अलावा राजद सुप्रीमो लालू यादव और सिने अभिनेता पुनीत इस्सर भी यहां पहुंचकर अपने—अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान संपन्न कर चुके हैं।