पटना : हिंदी सिनेमा के बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता संजीव कुमार को उनकी 89 वीं जयंती है और उन्होनें खिलौना, शोले, राजा और रंक, पति-पत्नी और वो, नया दिन नई रात, शिकार, दस्तक, कोशिश, अंगूर, मौसम, जानी दुश्मन, मौसम, त्रिशूल, अर्जुन पंडित, विधाता, उलझन, सीता और गीता, हीरो, नमकीन, राम तेरे कितने नाम जैसी सफल फिल्मों में शानदार अभिनय करने वाले ऑलराउंडर फ़िल्म अभिनेता के रूप में काफी लोकप्रिय हुए। सिने अभिनेता संजीव कुमार का मूल नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला है और वे हिंदी सिनेमा के एक महान बहुमुखी प्रतिभा के अभिनेता थे।
9 जुलाई 1938 को जन्मे दिग्गज फ़िल्म अभिनेता संजीव कुमार ने शोले में ” ठाकुर “और कोशिश में ” गूंगा – बहरा ” किरदार निभाकर अभिनय के नए मानक स्थापित किये तथा अपने 25 साल के करियर में दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले इस अभिनेता का 6 नवंबर 1985 को 47 वर्ष की अल्पायु में ही निधन हो गया।शुरुआती जीवन और थिएटर सूरत,गुजरात में जन्मे हरिहर जरीवाला उर्फ ” हरीभाई ” बचपन में ही अपने परिवार के साथ मुंबई आ गए थे,उन्हें बचपन से ही फिल्मों का शौक था और अभिनय के प्रति उनके जुनून के कारण ही उनकी मां ने अपने गहने गिरवी रखकर उन्हें एक्टिंग स्कूल में दाखिला दिलाया था,तब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय जन नाट्य संघ के साथ किया।
महज 19 साल की उम्र में उन्होंने एक नाटक “डमरू” में 60 साल के बूढ़े का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया था, फिल्मी सफर संजीव कुमार ने 1960 में “हम हिंदुस्तानी” फिल्म में एक छोटी भूमिका के साथ शुरुआत की और उन्होंने 1965 में “निशान” में पहली बार बतौर मुख्य अभिनेता के रूप में काम किया। 1970 में आई फिल्म ” खिलौना ” उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी, जिसमें उन्होंने मानसिक रूप से बीमार लड़के की भूमिका निभाई, तब उन्हें उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता था। जहां उन्होंने जवानी में ही “परिचय”, “आंधी” और “त्रिशूल” जैसी फिल्मों में उम्रदराज लोगों के शानदार किरदार निभाये। ” दस्तक “(1971)और ” कोशिश “(1972)फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
हलांकि उनकी यादगार फिल्में ” शोले “(1975): ठाकुर बलदेव सिंह का अमर किरदार तथा ” अंगूर “(1982) की दोहरी भूमिका वाली उनकी सबसे बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों में से एक था। पति-पत्नी और वो (1978) का कॉमिक टाइमिंग का बेहतरीन प्रदर्शन करने के साथ ही ” नया दिन नई रात “(1974)की इस फिल्म में उन्होंने 9 अलग-अलग किरदार निभाये।संजीव कुमार ने अपने जीवन में कभी शादी नहीं की तथा उनके परिवार में दो भाई और एक बहन थी,उन्हें बचपन से ही दिल की बीमारी थी और 6 नवंबर 1985 को मात्र 47 वर्ष की उम्र में ही दिल का दौरा पड़ने से उनका असामयिक निधन हो गया, जिससे भारतीय फिल्म जगत को अपूरणीय क्षति हुई।
वैसे तो तबस्सुम एवं संजीव कुमार का जन्मदिन एक ही तारीख को होने के कारण जब ये दोनों जीवित थे तो अधिकतर एक साथ ही जन्मदिन मनाया करते थे, लेकिन संजीव कुमार के निधन हो जाने के बाद तबस्सुम ने अपना जन्मदिन मनाना ही छोड़ दिया। साल 1966 में संजीव कुमार संग तबस्सुम ने “अली बाबा चालीस चोर” नाम की एक फिल्म में काम किया था, जिसे होमी वाडिया ने प्रोड्यूस किया था। पूरे देश के लोग आज भी बहुमुखी प्रतिभा के धनी सिने अभिनेता संजीव कुमार की चर्चायें खूब किया करते हैं।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट