बिहार की मौजूदा पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों का परिसीमन नए तरीके से किया जाएगा। इसके तहत पंचायतों का नाम अब गांव की आबादी के मुताबिक ही होगा। इसके लिए पंचायती राज विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों के नए सिरे से परिसीमन की अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें सबसे अहम बदलाव यह है कि अब ग्राम पंचायत का नाम उसी गांव के नाम पर होगा, जिसकी आबादी सबसे अधिक होगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिस गांव की आबादी ज्यादा होगी, उसी के नाम से पंचायत का नाम भी जाना जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को लेकर सम्राट सरकार द्वारा लिये गए इस बड़े फैसले के बाद अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों का गठन और परिसीमन नए सिरे से राजस्व ग्राम के आधार पर किया जाएगा।
पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी पंचायत का नामकरण उस क्षेत्र के सबसे अधिक आबादी वाले गांव के नाम पर तय होगा। इस नए नियम के लागू होने से राज्य की हजारों पंचायतों की भौगोलिक सीमाएं, उनके मुख्यालय और यहां तक कि उनके नाम भी बदल जाएंगे। इस पूरे परिसीमन प्रक्रिया के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों को मुख्य आधार माना जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त के सीधे निर्देश और देखरेख में सभी जिलों के जिला दंडाधिकारी यानी उस जिले के डीएम अपने-अपने जिलों के प्रत्येक प्रखंड में स्थित गांवों के लिए नए ग्राम पंचायत क्षेत्रों की घोषणा करेंगे। बता दें कि सरकार ने इसके साथ ही जिला परिषद, पंचायत समिति और वार्ड सदस्यों के क्षेत्रों के निर्धारण के संबंध में भी अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं।
नए नियमों के तहत यदि किसी पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत एक से अधिक गांव शामिल होते हैं, तो उस पंचायत का प्रशासनिक मुख्यालय उसी गांव में बनाया जाएगा जिसकी जनसंख्या सबसे अधिक होगी। मुख्यालय वाले गांव के नाम पर ही पूरी ग्राम पंचायत का आधिकारिक नाम घोषित किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने इसमें एक विशेष सामाजिक प्रावधान भी जोड़ा है। यदि किसी निर्धारित पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की संयुक्त आबादी कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत से अधिक होती है, तो मुख्यालय उस गांव में स्थापित किया जाएगा जहां इन वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे ज्यादा होगा। नए नियम में प्रशासनिक सुविधा और पारदर्शिता के लिए प्रत्येक प्रखंड को एक स्वतंत्र इकाई माना जाएगा। अधिसूचना में साफ किया गया है कि नए पंचायत क्षेत्रों की सीमाएं पूरी तरह स्पष्ट और प्राकृतिक होंगी। सीमाओं के सटीक निर्धारण के लिए इलाके की मुख्य सड़कें, रेलवे लाइन, नदियां, नहरें या अन्य बड़े सार्वजनिक संस्थानों को मील का पत्थर माना जाएगा। सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और सुपरविजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।