नवादा : जिले में जन वितरण प्रणाली नासूर बन गयी है। बहती गंगा में डुबकी लगाने में भ्रष्ट तंत्र इतना मशगूल हो गया है कि उसके सामने नियम कानून भी घुटने टेकने पर मजबूर हो गया है। तभी तो कहा जाता है “सैंया भये कोतवाल,अब डर काहे का”। जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र के अमांवा पूर्वी पंचायत जन वितरण प्रणाली विक्रेता योगेन्द्र पासवान का।
इन पर फर्जी अनुज्ञप्ति पर दुकान चलाने का आरोप है। की बार करायी गयी जांच व उम्र सत्यापन में यह सिद्ध हो चुका है कि इनकी अनुज्ञप्ति फर्जी है। यहां तक कि समाहर्ता द्वारा तीन सदस्यीय न्यायिक जांच में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। और तो और समाहर्ता द्वारा रजौली एसडीएम को अग्रेत्तर कार्रवाई का आदेश भी पूर्व में जारी किया जा चुका है। बावजूद कार्रवाई शून्य है। हद तो यह कि मामले की सुनवाई राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव के यहां चल रही है। प्रतिवेदन की मांग की जा रही है लेकिन परिणाम अबतक सिफर रहा है।
पुनः समाहर्ता को जांच का आदेश निर्गत कर एक बार फिर जीवनदान दिया गया है। अब फिर से दुबारा जांच होनी है। अब सबसे बड़ा सवाल क्या अन्य मामलों में ऐसा होता रहा है? अगर नहीं तो योगेन्द्र पासवान के मामले में ऐसा क्यों? आखिर बकरे की मां कबतक खैर मनाएगी? भ्रष्ट तंत्र कबतक संरक्षण देता रहेगा? सवाल गूंजने लगा है। बहरहाल अब समाहर्ता के अगले जांच पर नागरिकों की निगाहें टिकी है। आगे आगे देखिए होता है क्या?
भईया जी की रिपोर्ट