पटना/जमुई : राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तथा आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को बिहार के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक की संयुक्त अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ऑनलाइन जुड़े। इस दौरान साइबर सुरक्षा, जन-जागरूकता और साइबर अपराधों की रोकथाम से संबंधित दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने जिले में सुदृढ़ कार्ययोजना बनाकर उसे प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक में साइबर अपराध समन्वय केंद्र को और अधिक सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि साइबर अपराध के मामलों में क्षेत्राधिकार के विवाद में पड़े बिना तत्काल ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की जाए, ताकि जांच में किसी प्रकार की देरी न हो। शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal Module) पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निष्पादन करने तथा मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का प्रभावी उपयोग कर साइबर ठगी के पीड़ितों की फ्रीज की गई राशि शीघ्र वापस दिलाने के निर्देश भी दिए गए।
सोशल मीडिया पर अफवाहों एवं भड़काऊ सामग्री पर रोक लगाने के लिए सहयोग पोर्टल के माध्यम से आपत्तिजनक कंटेंट को तत्काल हटाने तथा समन्वय पोर्टल के जरिए त्वरित अलर्ट एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पुलिस बल की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए ‘साइट्रेन’ पोर्टल के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण तथा चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए। जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में प्रत्येक सप्ताह मंगलवार को ‘साइबर मंगलवार’ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बैठक के बाद जिला पदाधिकारी ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि “डिजिटल युग में सुरक्षा की पहली सीढ़ी हमारी अपनी सतर्कता है। साइबर अपराधी लोगों के डर और लालच का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी अनधिकृत फोन कॉल, संदेश या लिंक पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। जिला प्रशासन प्रत्येक मंगलवार को साइबर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगा।” वहीं पुलिस अधीक्षक ने लोगों से डिजिटल लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी कभी साझा न करें।
उन्होंने लॉटरी, बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने या अन्य प्रलोभन वाले संदिग्ध संदेशों के लिंक पर क्लिक न करने तथा इंटरनेट पर उपलब्ध रैंडम कस्टमर केयर नंबरों के बजाय केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध संपर्क सूत्रों का ही उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते बैंक खाते में लेन-देन को रोककर राशि सुरक्षित कराई जा सके।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट