नवादा : शहर के “संजीवन अस्पताल” के समीप एक लावारिस नवजात शिशु मिलने की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। सड़क किनारे पड़े मासूम को देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और पुलिस तथा संबंधित विभाग को सूचना दी। समय रहते लोगों की सतर्कता से बच्चे को सहायता मिल सकी। अब प्रशासन मामले की जांच कर रहा है कि आखिर नवजात को वहां किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर ऐसे लाखों दंपति हैं जो संतान सुख के लिए वर्षों तक इलाज कराते हैं, मंदिरों में माथा टेकते हैं, दुआएँ मांगते हैं और एक बच्चे की किलकारी सुनने का सपना देखते हैं। करोड़पति हो, अरबपति हो या एक सामान्य परिवार—संतान का सुख और उसकी चिंता किसी की आर्थिक स्थिति नहीं देखती। माता-पिता अपने बच्चों की एक छोटी-सी तकलीफ से भी बेचैन हो जाते हैं।
दूसरी ओर, जब किसी नवजात को इस तरह लावारिस छोड़ देने की खबर सामने आती है, तो मन पीड़ा से भर उठता है। यदि कोई परिवार किसी कारणवश नवजात का पालन-पोषण करने में असमर्थ है, तो भी बच्चे को असुरक्षित स्थान पर छोड़ देना समाधान नहीं है। ऐसे मामलों में प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है, ताकि बच्चे का जीवन सुरक्षित रहे।
यह समय किसी पर बिना जानकारी के आरोप लगाने का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता दिखाने का है। साथ ही, समाज को भी यह सोचने की आवश्यकता है कि ऐसी परिस्थितियाँ क्यों पैदा होती हैं? और हम मिलकर कैसे ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।
भईया जी की रिपोर्ट