भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस पूरे प्रकरण को NHRC में उठाते हुए स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच की मांग की है। उन्होंने मानवाधिकार आयोग को दी गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस की गोली लगने से मौत हुई। इस पूरे मामले को पुलिस ने गलत तरीके से हैंडल किया। युवक की फर्जी एनकाउंटर में मौत पूरी तरह मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है। वकील की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एनएचआरसी ने बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को एक नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है।
विदित हो कि भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बीते दिनों पुलिस ने एक एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी को गोली मारकर दबोचा था। बाद में उसकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद मुठभेड़ मामले ने तूल पकड़ लिया। इस पूरे मामले के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर बाहरी एजेंसी से जांच की मांग तेज हो गई है। शिकायतकर्ता ने इसे संदिग्ध मौत बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
इधर पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज करते हुए दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। पहली प्राथमिकी मुठभेड़ को लेकर भरत भूषण तिवारी के खिलाफ दर्ज की गई है, जबकि दूसरी प्राथमिकी पुलिस पर फायरिंग और सहयोग के आरोप में उसके पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद किया गया है। पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी के पास अवैध हथियार होने की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर 17 जून की सुबह पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी।