गृह विभाग ने पटना के बेऊर जेल के सुपरिटेंडेंट नीरज कुमार झा को सस्पेंड कर दिया है। कारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार बेऊर जेल के अंदर बड़े पैमाने पर ऑर्गनाइज़्ड रैकेट चल रहा था। इसमें कैदियों से पैसे ऐंठना, बहुत ज्यादा दामों पर सामान बेचना और नियमों का खुलेआम उल्लंघन करके चुने हुए कैदियों को वीआईपी सुविधाएं देना शामिल था। आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान नीरज झा का मुख्यालय भागलपुर जेल निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमों के मुताबिक सिर्फ गुजारा भत्ता ही इस दौरान मिलेगा।
औचक रेड में हुए थे कई अहम खुलासे
गृह विभाग को बेऊर जेल में बंद कैदियों और उनके परिवारों से लगातार गुप्त शिकायतें मिल रही थीं कि जेल के अंदर हर छोटी-बड़ी सुविधा के लिए उनसे बड़ी रकम वसूली जा रही है। इसके जवाब में जिला प्रशासन की एक टीम ने 20 जून को बेऊर जेल में सरप्राइज रेड की। इस रेड के दौरान कई गैर कानूनी गतिविधियों के बाट्रे में पता चला। लगभग सभी जेल वार्ड में नियमों को तोड़कर प्राइवेट मेस खुलेआम चलाए जा रहे थे।इतना ही नहीं इंस्पेक्शन टीम की मौजूदगी में भी कैदी इलेक्ट्रिक हीटर पर खाना बनाते पाए गए थे।
कीमत ज्यादा दिखा वसूली का आरोप
आरोप है कि कैंटीन में कैदियों को MRP (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) से कहीं ज्यादा दाम पर सामान बेचा जा रहा था। जेल एडमिनिस्ट्रेशन बाहर से सामान खरीदकर कैदियों को बहुत ज्यादा दामों पर बेच रहा था। 800 ml सरसों का तेल 500 और सब्जियां 200 प्रति किलोग्राम में बेची जा रही थीं। जो कैदी इस गैर-कानूनी वसूली का विरोध करते थे या पैसे नहीं दे पाते थे, उन्हें डराने और परेशान करने के लिए सेल में बंद कर दिया जाता था। इतना ही नहींजांच के दौरान बेउर जेल के अधिकारियों का बर्ताव बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना और बेशर्मी भरा था। जब डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की टीम वार्ड्स की तलाशी ले रही थी, तो जेल अधिकारियों ने सहयोग करने के बजाय इन्वेस्टिगेशन टीम को कैदियों के बीच अकेला और बिना सुरक्षा के छोड़ दिया, जबकि वे खुद बाहर निकल गए। यह इन्वेस्टिगेशन टीम की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज करने जैसा था। इसके अलावा घटना वाले दिन सुपरिटेंडेंट नीरज कुमार झा ऑफिशियली छुट्टी पर थे। इसके बावजूद वह बिना इजाजत के जेल परिसर में पहुंचे और इन्वेस्टिगेशन टीम को रोका और उनके काम का विरोध किया।