नेपाल में भूस्खलन से काली गंडकी और बूढ़ी गंडकी नदी के जलस्तर में अचानक तेज उफान के बाद बिहार के पश्चिम चंपारण में गंडक नदी को लेकर हाईअलर्ट कर दिया गया है। यहां वाल्मीकिनगर गंडक बराज से लेकर नदी के तटबंधों तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। जल संसाधन विभाग ने अभियंताओं को सचेत रहने और तटबंधों की सुरक्षा पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया है। फिलहाल बराज से 37 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होने की जानकारी दी गई है और पानी के प्रवाह में 20 से 25 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। जानकारी के अनुसार नेपाल के गोरखा जिले में यह भूस्खलन हुआ है जिसके बाद बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई और नदी के निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों में खतरे की आशंका बढ़ गई है।
नेपाल में यहां हुआ भूस्खलन
पड़ोसी देश में इस लैंड स्लाइड से बिहार में भी नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। जानकारी के अनुसार पश्चिम चंपारण में प्रशासन गंडक नदी की स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। वाल्मीकिनगर बराज के साथ नदी के तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़़ा दी गई है और अभियंताओं को निर्देश दिया गया है कि वे संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए लगातार निगरानी करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके। विदित हो कि नेपाल में बीते दिन की सुबह गोरखा जिले के चुमनुबरी गांव में भूस्खलन से बूढ़ी गंडकी नदी अवरुद्ध हो गई। बाद में नदी पर बना अस्थायी बांध टूट गया जिससे गाद-मलबे के साथ तेज सैलाब नीचे आया। इसमें जगत बाजार और सलेरी बाजार में 35-40 घर, 6 पुल और बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का कैंप बह गया। यहां जलस्तर सुबह 3.66 मीटर से बढ़कर 8.43 मीटर हो गया जो खतरे के निशान 5 मीटर से ज्यादा है।
बिहार में इतना असर पड़ेगा
केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि बूढ़ी गंडकी में आरुघाट पर जलस्तर तेजी से बढ़ा है और इसका असर काली गंडकी होते हुए निचले इलाके में भारत स्थित पूरे गंडक सिस्टम पर आएगा। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि बिहार में वाल्मीकिनगर बराज पर जलस्तर में बढ़ोतरी संभव है, लेकिन आगे भारतीय सीमा में पहुंचते-पहुंचते नदी का वेग काफी कमजोर हो जाएगा। आयोग के मुताबिक निचले इलाकों और दियारा क्षेत्र में जान-माल को बड़ा खतरा नहीं है, फिर भी बॉर्डर के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल बिहार में नदी पर बने बराज से पानी का डिस्चार्ज सामान्य है। लेकिन नेपाल में नदी के प्रवाह में बदलाव को देखते हुए आगे पानी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है।
