-खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव ने दिया पन्द्रह दिनों के अंदर कार्रवाई का आदेश
नवादा : जब अनुज्ञप्ति ही फर्जी हो, तो फिर खाद्यान्न का कैसे? फिजा में सवाल गूंजने लगे हैं। जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड अमांवा पूर्वी पंचायत पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान का। जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल की लम्बी लड़ाई के बाद आखिरकार रजौली एसडीपीओ ने राज्य खाद्यान्न सचिव के समक्ष अनुज्ञप्ति का फर्जी होना स्वीकार कर लिया है। अवसर था सोमवार को समाहरणालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से सुनवाई का। चूंकि अनुज्ञप्ति को जारी करने या रद्द करने का अधिकार एसडीपीओ को है फलत: सचिव ने पन्द्रह दिनों का समय एसडीपीओ को दिया है।
बता दें इसके पूर्व डीएम के आदेश पर त्रिसदस्यीय जांच कमिटी द्वारा दो दो बार की गयी जांच में अनुज्ञप्ति को फर्जी होने का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था। डीएम के आदेश पर एसडीपीओ ने दो बार पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान से स्पष्टीकरण की मांग की। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाये जाने पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने अनुज्ञप्ति रद्द करने की अनुसंशा एसडीपीओ से की है। बावजूद संचिका एसडीपीओ के टेबल पर धूल फांक रही है। अब सबसे बड़ा सवाल अगले महीने का खाद्यान्न उठाव के बाद अनुज्ञप्ति रद्द होगा या इसके पूर्व? क्या एसडीपीओ सचिव का पन्द्रह दिनों का समय सीमा का इंतजार करेंगे या फिर, खाद्यान्न उठाव का? इस प्रकार के सवाल फिजा में तैरने लगे हैं।
भईया जी की रिपोर्ट
