सम्राट चौधरी सरकार ने पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हरीश कुमार को बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए गठित 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष बनाया है। पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरीश कुमार बिहार में होने वाली आगामी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार और पारदर्शिता लाने हेतु सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। इस समिति में समेत कुल 5 सदस्य होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार ये समिति तीन महीने में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और इसमें पारदर्शिता के लिए अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। इस समिति के कार्यक्षेत्र अंतर्गत राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार की अनुशंसा अपेक्षित है।
सामान्य प्रशासन विभाग से अधिसूचना जारी
विदित हो कि हाल ही में 23 अगस्त 2026 को बिहार सरकार ने छात्रों के आंदोलन के बीच परीक्षा सुधार के लिए इस समिति के गठन का प्रावधान किया था। इसके बाद राज्य सरकार के अनुरोध पर हाईकोर्ट के महानिबंधक की ओर से न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम का प्रस्ताव भेजा गया। इसके बाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन्हें बतौर इस समिति के अध्यक्ष, नोटिफाई कर दिया और बीती शाम सामान्य प्रशासन विभाग ने उनके मनोनयन की अधिसूचना भी जारी कर दी। मालूम हो कि बिहार में हर साल विभिन्न बोर्डों, आयोगों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। विगत कई वर्षों से बिहार की विभिन्न परीक्षाओं में पेपरलीक, कदाचार और भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आए हैं। इससे इन परीक्षाओं और बहालियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा संचालन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और संपूर्ण प्रक्रिया को अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाना है।
परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति को ये करना है…
परीक्षा एजेंसियों का मूल्यांकन: BPSC, BPSSC, पुलिस भर्ती बोर्ड, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और विश्वविद्यालयों की भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा करना।
प्रश्नपत्रों और केंद्रों की सुरक्षा: प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाना।
तकनीकी और व्यवस्थागत सुधार: परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था और अभ्यर्थियों की सुविधाओं में सुधार लाना।
पारदर्शिता बढ़ाना: परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना और पूरे सिस्टम को विश्वसनीय बनाना।