नवादा : डीएम अपने मातहतों को बचाने का लाख प्रयास कर लें लेकिन बचा पाना मुश्किल होगा। ऐसा इसलिए कि डीएम अंतिम नहीं होते उनके उपर भी कोई है। जब सारा साक्ष्य पोर्टल पर उपलब्ध हो तो इसे कोई झूठला कैसे सकता है?
जी हां ! यहां हम बात कर रहे हैं आइसीडीएस ( डीपीओ) निरुपमा शंकर का। उन्होंने एक ही समय कौआकोल व रोह प्रखंड आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण इतनी तेज कि ध्वनि व प्रकाश की गति से भी तेज। निरीक्षण पोर्टल पर दर्ज किया गया था।
उपरोक्त मामले को जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल ने संज्ञान लेते हुए मामला डीएम समेत विभिन्न अधिकारियों के समक्ष रखा लेकिन किसी ने मामले का संज्ञान तक नहीं लिया। भला चर्चिल भी कहां चुप बैठने वाले थे सो उन्होंने द्वितीय अपील समाज कल्याण विभाग के यहां दायर कर दिया।
अबतक उक्त मामले की सुनवाई प्रधान सचिव समाज कल्याण विभाग पटना ने 02 सितंबर को निर्धारित की गयी है जिसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करायी गयी है। ऐसे में डीपीओ की मुश्किलें कमने के बजाय एक बार फिर बढ़ गयी है।
भईया जी की रिपोर्ट
