नवादा : जिले के मेसकौर प्रखंड की रसलपुरा पंचायत की पश्चिमी बेलदारी गांव में जहरीले सांप के डसने से भाई-बहन की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। आठ वर्षीय सरस्वती कुमारी की मौत इलाज के दौरान पहले हो गई, जबकि 12 वर्षीय भाई चिंटू कुमार ने आठ दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद पावापुरी मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की मौत से गांव में मातम पसरा है।
जानकारी के अनुसार बेलदारी गांव निवासी संजय चौहान के पुत्र चिंटू कुमार और पुत्री सरस्वती कुमारी अलग-अलग खाट पर सो रहे थे। इसी दौरान एक विषैला सांप घर में घुस आया और दोनों बच्चों को डस लिया। परिजनों ने सांप को पकड़ लिया, लेकिन तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पूरी रात झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के भरोसे इलाज कराते रहे।
सुबह जब दोनों बच्चों की हालत बिगड़ने लगी, तब उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए पावापुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान 28 जुलाई को सरस्वती कुमारी की मौत हो गई, जबकि चिंटू कुमार छह दिनों तक जीवन और मौत से संघर्ष करता रहा और उसने भी दम तोड़ दिया।
संजय चौहान एक गरीब परिवार से हैं। उनके परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे थे। हादसे में उन्होंने एक बेटा और एक बेटी दोनों को खो दिया। घटना के बाद घर में मातम पसरा है और गांव के लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। प्रखंड विकास पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपदा राहत योजना के तहत पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक या अंधविश्वास के भरोसे समय गंवाना जानलेवा हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध रहता है। समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। बेलदारी गांव की यह घटना अंधविश्वास के दुष्परिणाम और समय पर चिकित्सा की आवश्यकता की गंभीर सीख देती है।
भईया जी की रिपोर्ट