नवादा : सरकार लाख प्रयास कर ले लेकिन शिक्षा विभाग में शिक्षकों की मनमानी अब भी जारी है। खासकर जब शिक्षक किसी संघ का नेता हो तो विद्यालय से गायब रहना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ लेते हैं। कुछ इसी प्रकार का एक मामला अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पाण्डेय बिगहा का सामने आया है। वैसे हर कोई जानता है मैं अपना कलम तभी उठाता हूं जब मेरे पास पुख्ता प्रमाण हो। सो हालात यह कि आरोपी का हाल वही है ” चोरी भी,उपर से सीनाजोरी भी”
जी हां! अब मैं आता हूं मूल बात पर। उक्त विद्यालय में पूर्व में नरेन्द्र कुमार प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। विभागीय आदेश के आलोक में एस आर हसन की प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्ति होने के बाद उन्होंने योगदान दिया। नियमत: पूर्व प्रधानाध्यापक को संपूर्ण प्रभार सौंपा जाना था लेकिन उन्होंने आंशिक प्रभार सौंपा। जाहिर है ऐसा किये जाने से नव नियुक्त प्रधानाध्यापक को परेशानी हो रही थी सो उन्होंने बीईओ से गुहार लगायी।
बीईओ विद्यानंद कुमार ने 21 जुलाई को पत्र जारी कर नरेन्द्र कुमार संपूर्ण प्रभार सौंपने का आदेश निर्गत किया। आदेश उन्हें नागवार गुजरा और उन्होंने बीईओ पर रिश्वत मांगे जाने का आरोप मीडिया के माध्यम से लगाया दिया। अब आइए दूसरे मामले में। जनाब की तो विद्यालय आने की आदत नहीं थी। रहती भी कैसे? खुद को शिक्षकों का नेता जो मानते हैं। सो बीईओ विद्यानंद कुमार ने उक्त विद्यालय का 24 जुलाई को करीब ग्यारह बजकर 15 मिनट पर औचक निरीक्षण किया जिसमें बगैर सूचना वे गायब पाए गए।
आश्चर्य यह कि शिक्षा पोर्टल वे चार बजे संध्या विद्यालय इन करते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल विद्यालय खुलने व बंद होने का समय क्या है? जाहिर है जब विद्यालय से अनुपस्थित हैं तो स्पष्टीकरण की मांग तो होगी ही। सो 27 जुलाई को पत्र जारी कर बीईओ ने स्पष्टीकरण की मांग कर दी है। इसीलिए मैंने कहा कि चोरी भी और सीनाजोरी भी”। खुद विद्यालय से गायब रहकर दूसरे पर लगा रहे हैं रिश्वत मांगे जाने का आरोप?
भईया जी की रिपोर्ट