नवादा : जिले के मेसकौर प्रखंड के पश्चिमी छोर से गुजरने वाली ढाढर नदी पर पुल नहीं होने का खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ रहा है। बरसात शुरू होते ही नदी में पानी बढ़ने के बाद मिर्जापुर समेत आसपास के करीब छह गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया। एक पिता अपने बच्चों को कंधे पर बैठाकर कमर भर पानी वाली नदी पार कराते नजर आए। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अभिभावकों को हर बरसात में इसी तरह जोखिम उठाना पड़ रहा है।
स्कूल जाने के लिए बच्चों को कंधे पर उठाकर करा रहे नदी पार
मिर्जापुर निवासी उमेश कुमार ने बताया कि उनके बच्चे निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना किसी चुनौती से कम नहीं। एक अभिभावक अपने बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार कराते दिखे। नदी में पानी बढ़ने पर महिलाओं, मरीजों और बुजुर्गों को भी इसी तरह मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
पुल के अभाव में एक दर्जन गांवों की जिंदगी प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार, ढाढर नदी मिर्जापुर सहित करीब एक दर्जन गांवों के लोगों की आवाजाही को प्रभावित करती है। नदी पर पुल नहीं होने से बरसात के मौसम में ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। किसानों को खेतों तक पहुंचने, बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को इलाज के लिए ले जाने में परेशानी होती है। कमर भर पानी में नदी पार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है।
आश्वासन के बाद भी नहीं शुरू हुआ पुल निर्माण
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। विधानसभा चुनाव से पहले सांसद विवेक ठाकुर ने क्षेत्र की एक सभा में पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। हर साल बरसात आते ही वही पुरानी समस्या फिर सामने खड़ी हो जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई नियमित होगी और किसानों की आवाजाही आसान हो जाएगी।मरीजों और महिलाओं को नदी पार करने के जोखिम से राहत मिलेगी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुल नहीं बनता, तब तक हर बरसात में बच्चों को कंधे पर बैठाकर और जान जोखिम में डालकर नदी पार कराने की मजबूरी बनी रहेगी।
भईया जी की रिपोर्ट