-पूर्व में जिसने जांच में दोषी पाया उसी को मिली जिम्मेदारी
नवादा : जिले के एक पीडीएस विक्रेता को बचाने के चक्कर में अधिकारियों ने सारी सीमाएं पार कर दी है। हालात यह है कि त्रिसदस्यीय जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद पुनः जांच कराये जाने का औचित्य नहीं रहने के बावजूद पुनः जांच के आदेश राज्य खाद्य सचिव ने डीएम को सौंपा है। जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र अमांवा पश्चिमी पंचायत के फर्जी पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान का। पासवान की अनुज्ञप्ति बचाने का प्रयास राज्य से लेकर जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों द्वारा लगातार किया जा रहा है।
इन सबों से इतर पासवान के विरुद्ध एक और मामला सामने आया है। उन्होंने अंत्योदय योजना के एक लाभुक कार्तिक यादव को योजना के लाभ से बंचित कर उक्त राशन कार्ड अपने पुत्र व पुत्री का आधार सीडिंग कर अपने ही पाश मशीन से खाद्यान्न का उठाव लगातार किया जा रहा है जो नियम के पूर्णतः प्रतिकूल है। आरोप से संबंधित आवेदन सचिव समेत समाहर्ता को उपलब्ध कराया गया है जिसकी जांच होनी शेष है।
अब आते हैं मूल बात पर। राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव ने पूर्व में रजौली एसडीएम द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन का अवलोकन तो किया लेकिन बगैर किसी टिप्पणी के पुनः डीएम को जांच कराने का निर्देश दे दिया। जाहिर है ऐसा बचाने के चक्कर में हुआ। डीएम ने भी जांच उन्हीं पदाधिकारियों को सौंप दी जिन्होंने पूर्व में जांच के बाद दोषी करार दिया था। उक्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में डीएम ने रजौली एसडीएम को कार्रवाई का आदेश दिया था लेकिन नियम के विरुद्ध जिसका अधिकार एसडीएम को है ही नहीं विधि विभाग से मार्गदर्शन के लिए भेज दिया। अब भला विधि विभाग उन्हें मार्गदर्शन देगा क्यों? सो मामला अधर में लटका है।
अब बात करते हैं अंत्योदय में फर्जीवाड़े का तो इसी मामले में एक पखवाड़े पूर्व सिरदला प्रखंड बड़गांव पंचायत अमोखरी पीडीएस विक्रेता विरेन्द्र सिंह की अनुज्ञप्ति रद्द की जा चुकी है। चूंकि वे – । लेकिन योगेन्द्र के मामले में निर्धारित 23 जुलाई से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। अब सबसे बड़ा सवाल आखिर एक फर्जी अनुज्ञप्ति मामले में ऐसा क्यों? वैसे अब सुनवाई की अगली तिथि का इंतजार हर किसी को रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट