नवादा : व्यवहार न्यायालय के रिकॉर्ड रूम से रोह थाना कांड संख्या 93/1996 की मूल एफआईआर, चार्जशीट और केस डायरी गायब होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायालय ने मामले को समाप्त नहीं किया है, बल्कि साक्ष्यों के अभाव में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया है.श। ऐसे में कानूनी प्रावधानों के तहत इस मामले के दोबारा आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
उपलब्ध न्यायिक आदेश के अनुसार, न्यायिक दंडाधिकारी संतोष कुमार ने मामले को साक्ष्यों की अनुपलब्धता के कारण साइन डाई (अनिश्चितकाल के लिए स्थगित) किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मामला समाप्त हो गया है या आरोपितों को बरी कर दिया गया है। यदि भविष्य में संबंधित दस्तावेज या अन्य वैध साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, तो मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि अदालत का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो वर्ष 1996 में दर्ज रोह थाना कांड संख्या 93/1996 से संबंधित जानकारी थाना के क्राइम रजिस्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध हो सकती है। इन अभिलेखों के आधार पर मामले की जानकारी जुटाई जा सकती है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी आपराधिक मामले का अदालती रिकॉर्ड नष्ट या गायब हो जाता है, तो सक्षम न्यायालय उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दे सकता है। इसके लिए संबंधित पुलिस अभिलेख और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकता है।
कोई भी नागरिक सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत रोह प्रखंड कार्यालय, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या नवादा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से वर्ष 1996 के रोह थाना कांड संख्या 93/1996 से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की जानकारी मांग सकता है। यदि संबंधित विभागों से प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो उनका उपयोग नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया में किया जा सकता है। मामले में आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित अभिलेख उपलब्ध होते हैं या नहीं और न्यायालय उन्हें किस प्रकार स्वीकार करता है। अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच एजेंसियों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
भईया जी की रिपोर्ट