पटना/नालंदा : नालंदा समाहरणालय का जिला पदाधिकारी कक्ष शुक्रवार को प्रशासनिक बैठकों के बजाय प्रेरणा, उत्साह और सपनों का केंद्र बन गया। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कमरुद्दीनगंज (बिहारशरीफ) की कक्षा 6, 7 और 8 की छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान उन्हें जिला पदाधिकारी उदिता सिंह से सीधे संवाद का अवसर मिला।
डीएम उदिता सिंह ने छात्राओं से आत्मीय बातचीत करते हुए उनके भविष्य के सपनों, पढ़ाई और चुनौतियों के बारे में जाना। शुरुआत में झिझक रही बच्चियों को उन्होंने खुलकर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, “सहना नहीं, कहना है। अपनी भावनाएं, समस्याएं और सपने खुलकर व्यक्त कीजिए।” उन्होंने महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी देते हुए कहा कि अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं की जानकारी ही सशक्त बनने की पहली सीढ़ी है। संवाद के दौरान एक छात्रा ने पूछा कि वह आईएएस कैसे बनीं। इस पर डीएम ने बताया कि उनका पहला सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और कठिन परिश्रम के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुईं।
उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि जब उनके मित्र बड़ी कंपनियों में नौकरी कर रहे थे, तब भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपने लक्ष्य पर डटी रहीं। उन्होंने कहा, “सफलता की असली कीमत तब समझ आती है, जब वह लंबे संघर्ष और कठिन परिश्रम के बाद मिलती है।” छात्राओं को प्रेरित करते हुए डीएम ने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कठिनाइयाँ व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा, “जो जितना तपता है, वह उतना ही चमकता है, ठीक सूर्य की तरह। संघर्ष को बोझ नहीं, अवसर समझिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए छात्राओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत करने का संदेश दिया। संवाद के दौरान छात्राओं ने विद्यालय में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी एंड वेलनेस जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा नृत्य एवं संगीत की नियमित कक्षाएं शुरू कराने की मांग रखी। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और कहा कि शिक्षा के साथ कौशल विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियां भी बच्चियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।कार्यक्रम के अंत में डीएम ने छात्राओं को संकल्प दिलाया कि वे बड़े होकर अपने माता-पिता, विद्यालय, नालंदा जिले और देश का नाम रोशन करेंगी। छात्राओं ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ इस संकल्प को दोहराया।
इसके बाद छात्राओं को पुलिस कंट्रोल रूम, लोक शिकायत निवारण कार्यालय, व्यवहार न्यायालय, वन स्टॉप सेंटर और आरटीपीएस काउंटर सहित जिला मुख्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्हें प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) अर्चना कुमारी, जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डन सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। छात्राओं के लिए यह भ्रमण प्रशासनिक व्यवस्था को समझने के साथ-साथ आत्मविश्वास, नेतृत्व और बड़े सपने देखने की प्रेरणा देने वाला यादगार अनुभव साबित हुआ।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट