– मनरेगा में पहली बार हुई बड़ी कार्रवाई
नवादा : जिले के मेसकौर प्रखंड में मनरेगा योजनाओं में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि प्राक्कलन के अनुसार निर्धारित कार्य पूरा किए बिना ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के उप विकास आयुक्त-सह-अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक की ओर से कार्रवाई का आदेश जारी किया गया। सेवानिवृत्त अभियंता कपिलदेव सिंह की ओर से दिए गए परिवाद पत्र के आधार पर हुई संयुक्त जांच में मनरेगा की दो योजनाओं में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
650 फीट नाला निर्माण की जगह मिला सिर्फ 265 फीट काम
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मेसकौर प्रखंड के मेढ़कुरी गांव में पंचायत भवन से नदी तक नाला निर्माण योजना में भारी अनियमितता पाई गई। योजना के तहत प्राक्कलन में 650 फीट नाला निर्माण का प्रावधान था, लेकिन स्थल जांच के दौरान मात्र 265 फीट नाला निर्मित पाया गया। इसी तरह बिजुबिगहा गांव में साधु चौधरी के घर से महुआ बांध तक नाली एवं ईंट सोलिंग कार्य में गड़बड़ी मिली। उपरोक्त योजना में 650 फीट कार्य के स्थान पर केवल 85 फीट काम धरातल पर पाया गया। जांच अधिकारियों ने वास्तविक कार्य और निकाली गई राशि में भारी अंतर को वित्तीय अनियमितता माना।
12.83 लाख रुपये की होगी वसूली, तीन वर्षों तक मानदेय में कटौती
तकनीकी जांच प्रतिवेदन के आधार पर दोनों योजनाओं से कुल 12 लाख 83 हजार 404 रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है। इसमें मेढ़कुरी नाला निर्माण योजना से 4 लाख 95 हजार 582 रुपये और बिजुबिगहा नाली-सोलिंग योजना से 7 लाख 87 हजार 822 रुपये की राशि शामिल है।
प्रशासन ने संबंधित कर्मियों को एक सप्ताह के अंदर राशि बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के बैंक खाते में जमा कर रसीद कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा दोषी पाए गए कर्मियों के मूल मानदेय में अगले तीन वर्षों तक 20 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया गया है। समय सीमा के अंदर राशि जमा नहीं करने पर कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी समेत पांच कर्मियों पर कार्रवाई
मनरेगा योजनाओं में अनियमितता के मामले में पांच अधिकारियों और कर्मियों को दोषी पाया गया है। इनमें तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी विनोद कुमार, वर्तमान में जहानाबाद में पदस्थापित, तत्कालीन पंचायत तकनीकी सहायक मुकेश कुमार वर्मा, वर्तमान में हिसुआ में पदस्थापित, तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक प्रमोद कुमार, वर्तमान में कौआकोल में पदस्थापित, मनरेगा के कार्यपालक अभियंता अमरेंद्र कुमार सिंह और तत्कालीन मेसकौर प्रखंड नाजीर रमेश कुमार शामिल हैं। जांच के दौरान इन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन वे अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद प्रशासन ने इन्हें दोषी मानते हुए राशि वसूली और विभागीय कार्रवाई के लिए जिला स्थापना शाखा को अनुशंसा भेज दी है।
जांच के बाद प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख
मनरेगा योजनाओं में सरकारी राशि के दुरुपयोग को लेकर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
बता दें जिले में मनरेगा में लूट का बाजार गर्म है। कई बार प्रमाण के साथ ” भैया जी ‘ ने खुलासा किया लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच तक जिला प्रशासन ने कराना उचित नहीं समझा। अब जब कार्रवाई आरंभ हुई है तो आम नागरिकों को प्रशासन पर विश्वास जगा है। कुछ हद तक ही सही। ऐसे में देखना है कि अबतक जिला प्रशासन जनता के विश्वास पर खरा उतरती है? क्योंकि जल्द ही कई मामले का पर्दाफाश किया जायेगा।
भईया जी की रिपोर्ट