नवादा : जिले में खरीफ सीजन के तहत धान आच्छादन धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। मानसून की सक्रियता के साथ ही किसान खेतों में उतर चुके हैं और विभिन्न प्रखंडों में रोपाई का कार्य लगातार बढ़त जा रहा है। हालांकि प्रर्याप्त पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान थोड़े निराश हैं, पर मौसम पूर्वानुमान से उम्मीद बरकरार है।
अच्छी बात यह है कि सिर्फ चार प्रखंडों को छोड़कर शेष प्रखंडों में धान की रोपाई शुरू हो चुकी है। खरीफ सीजन में जिले में धान आच्छादन के कुल लक्ष्य 90,124.15 हेक्टेयर के मुकाबले अब तक 506.33 हेक्टेयर में आच्छादन पूरा कर लिया गया है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 0.56 प्रतिशत है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश के साथ इस आंकड़े में भारी उछाल आएगा। जिले के सभी 14 प्रखंडों में धान की रोपाई अब भी शुरू नहीं सकी है, लेकिन बारिश के अभाव के बीच भी किसानों ने अपने संसाधनों से यह कार्य शुरू कर दिया है।
धान रोपाई की वर्तमान स्थिति
वारिसलीगंज प्रखंड में सबसे अधिक 173.56 हेक्टेयर (लक्ष्य 8631.00 हेक्टेयर) में रोपनी हुई है। इसके बाद पकरीबरावां में 146.50 हेक्टेयर (लक्ष्य 7463.00 हेक्टेयर) और नारदीगंज में 112.00 हектेयर (लक्ष्य 4868.00 हेक्टेयर) में धान की रोपनी की जा चुकी है। काशीचक प्रखंड में 59.25 हेक्टेयर (लक्ष्य 3187.80 हेक्टेयर), हिसुआ में 5.00 हेक्टेयर (लक्ष्य 6334.00 हेक्टेयर), अकबरपुर में 4.13 हेक्टेयर (लक्ष्य 9264.00 हेक्टेयर), नरहट में 2.55 हेक्टेयर (लक्ष्य 4776.00 हेक्टेयर), गोविंदपुर में 2.30 हेक्टेयर (लक्ष्य 3697.85 हेक्टेयर), नवादा सदर में 0.54 हेक्टेयर (लक्ष्य 8356.00 हेक्टेयर) तथा रजौली में 0.50 हेक्टेयर (लक्ष्य 6770.00 हेक्टेयर) में आच्छादन हुआ है। वहीं दूसरी ओर, कौआकोल (लक्ष्य 7704.40 हेक्टेयर), मेसकौर (लक्ष्य 4500.00 हेक्टेयर), रोह (लक्ष्य 6422.10 हेक्टेयर) और सिरदला (लक्ष्य 8150.00 हेक्टेयर) प्रखंडों में रोपाई का इंतजार है क्योंकि यहां किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हैं।
धान की रोपनी की रफ्तार धीमी,मानसून का इंतजार
धान रोपनी की इस शुरुआती तेजी के पीछे सबसे मुख्य कारण जिले में बिचड़ा आच्छादन का शत-प्रतिशत पूरा होना है। जिला कृषि पदाधिकारी अजीत प्रकाश ने बताया कि जिले में कुल 9,012.42 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा (नर्सरी) लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे किसानों ने कठिन परिश्रम से पूरी तरह हासिल कर लिया है। अकबरपुर में 926.40 हेक्टेयर, गोविंदपुर में 369.79 हेक्टेयर, हिसुआ में 633.40 हेक्टेयर, काशीचक में 318.78 हेक्टेयर, कौआकोल में 770.44 हेक्टेयर, मेसकौर में 450.00 हेक्टेयर, नारदीगंज में 486.80 हेक्टेयर, नरहट में 477.60 हेक्टेयर, नवादा में 835.60 हेक्टेयर, पकड़ीबरावां में 746.30 हेक्टेयर, रजौली में 677.00 हेक्टेयर, रोह में 642.21 हेक्टेयर, सिरदला में 815.00 हेक्टेयर और वारिसलीगंज में 863.10 हेक्टेयर में शत-प्रतिशत बिचड़ा तैयार हो चुका है। बिचड़ा पूरी तरह तैयार होने से अब किसानों को केवल बेहतर बारिश और पानी की उपलब्धता का इंतजार है ताकि रोपाई को अंतिम रूप दिया जा सके।
बारिश के आंकड़ों में सुधार
जुलाई महीने के वर्षापात के आंकड़े धीरे-धीरे खेती के अनुकूल दिख रहे हैं, हालांकि अभी झमाझम बारिश की बेहद जरूरत है। जिला कृषि कार्यालय द्वारा 13 जुलाई तक दर्ज किए गए वर्षापात के अनुसार, रजौली प्रखंड में सबसे अधिक 151.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके बाद काशीचक प्रखंड में 105.4 मिमी, अकबरपुर में 96.4 मिमी, कौआकोल में 90.6 मिमी, नारदीगंज में 73.2 मिमी, वारिसलीगंज में 72.6 मिमी, पकरीबरावां में 67.2 मिमी, गोविंदपुर में 58.2 मिमी, सिरदला में 56.4 मिमी, हिसुआ में 48.2 मिमी, रोह में 46.0 मिमी, मेसकौर में 31.2 मिमी और नवादा सदर में 15.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि वर्षा का यह वितरण सभी प्रखंडों में एक समान नहीं है, लेकिन नमी ने खेतों को तैयार करने और धान की शुरुआती रोपनी को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भईया जी की रिपोर्ट