पटना : हितैषी हैप्पीनेस होम के 19वें स्थापना दिवस तथा अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोध दिवस के अवसर पर पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित नशा मुक्ति एवं मानसिक आरोग्य केंद्र में जागरूकता संगोष्ठी, निःशुल्क काउंसलिंग शिविर एवं जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था का 19वाँ स्थापना दिवस भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के वरिष्ठ मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, चिकित्सकों, समाजसेवियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संस्था के प्रबंध निदेशक डॉ. विवेक विशाल ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) द्वारा वर्ष 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस की थीम “World Drug Problem: Persisting Issues, New Challenges, Innovative Responses” अर्थात “विश्व मादक पदार्थ समस्या : स्थायी मुद्दे, नई चुनौतियाँ और अभिनव समाधान” निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ नशे की चुनौतियाँ भी बदल रही हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रोकथाम, जनजागरूकता, वैज्ञानिक उपचार, पुनर्वास तथा समाज की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
डॉ. विवेक विशाल ने कहा कि नशा आज केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक संकट का विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि हितैषी हैप्पीनेस होम पिछले 19 वर्षों से नशा पीड़ितों एवं मानसिक रोगियों के उपचार, पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन का कार्य कर रहा है। आने वाले समय में संस्था विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विभिन्न संस्थानों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगी। इंग्लैंड के चिकित्सक डॉ. बाल्मीकि कुमार ने कहा कि नशा हर देश और हर समाज की समस्या है। उपचार से अधिक महत्वपूर्ण बचाव है। उन्होंने अभिभावकों से घर का वातावरण सकारात्मक रखने, बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करने तथा उनके व्यवहार या पढ़ाई में बदलाव आने पर डाँटने के बजाय कारण समझने का प्रयास करने की अपील की।
कोइलवर मानसिक अस्पताल के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. के.पी. शर्मा ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद सिंथेटिक ड्रग्स, नशीली गोलियों एवं अन्य मादक पदार्थों का प्रचलन बढ़ा है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में विशेष रणनीति, सख्त निगरानी और व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह ने कहा कि नशे से स्थायी मुक्ति के लिए केवल मरीज का उपचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की काउंसलिंग और सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। रांची के पूर्व वरीय मनोचिकित्सक डॉ. ए.के. गुप्ता ने कहा कि यदि नशे की समस्या पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ी गंभीर सामाजिक एवं मानसिक संकट का सामना करेगी।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवम सुनील ने कहा कि नशे की लत एक दीर्घकालिक मस्तिष्क संबंधी बीमारी है, जिसका समय पर वैज्ञानिक उपचार संभव है। समाज को नशा पीड़ित व्यक्ति को अपराधी नहीं, बल्कि मरीज के रूप में स्वीकार करना चाहिए। कोइलवर मानसिक अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. माधवेन्द्र सिंह ने कहा कि तनाव, अवसाद, गलत संगति और सामाजिक दबाव युवाओं को नशे की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने उपचार के साथ-साथ मनोचिकित्सा, काउंसलिंग और पुनर्वास को समान महत्व देने की आवश्यकता बताई। वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि नशे से जूझ रहे व्यक्ति को सबसे अधिक आवश्यकता परिवार के विश्वास, धैर्य और भावनात्मक सहयोग की होती है। समय पर काउंसलिंग कई लोगों को नशे की गिरफ्त में जाने से बचा सकती है।
मनोवैज्ञानिक कामिनी कुमारी ने कहा कि किशोरों और युवाओं में बढ़ता तनाव, सोशल मीडिया का प्रभाव तथा संवाद की कमी नशे के प्रमुख कारण बन रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। काउंसलर नुसरत जहाँ ने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन समय रहते सही मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग से इसे रोका जा सकता है। डॉ. बृज भूषण ने कहा कि समाज में यह धारणा गलत है कि नशे की समस्या केवल गरीबों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि नशा अमीरी-गरीबी नहीं देखता और किसी भी परिवार के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है। इसलिए प्रत्येक अभिभावक को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलाव पर सतर्कता से ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों ने बिहार में नशे की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शराबबंदी के बावजूद नशीली गोलियों, इंजेक्शन, गांजा, ब्राउन शुगर, स्मैक तथा अन्य सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से किशोरों और युवाओं में इनकी उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केवल कानून से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और मीडिया को मिलकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना होगा। कार्यक्रम के दौरान नशा पीड़ित व्यक्तियों के लिए निःशुल्क मनोवैज्ञानिक परामर्श एवं काउंसलिंग शिविर का भी आयोजन किया गया।
इस दौरान डॉ. प्रतिभा सिंह, नुसरत जहाँ, कामिनी कुमारी, डॉ. आराधना कुमारी, सोनल, अनुप्रिया एवं सीमा ने 30 नशा पीड़ित व्यक्तियों की निःशुल्क काउंसलिंग कर उन्हें उपचार, पुनर्वास तथा नशामुक्त जीवन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न स्थानों पर पोस्टर प्रदर्शन एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में संस्था की निदेशक सुमिता शर्मा ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हितैषी हैप्पीनेस होम आगे भी बिहार को नशामुक्त एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। कार्यक्रम का समापन “नशामुक्त बिहार – स्वस्थ भारत” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट