भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आज बुधवार को बिलौटी गांव में हो रही महापंचायत से ठीक पहले बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जगदीशपुर के एसडीपीओ को हटा दिया है। अभी कल ही इस मामले में भारी दबाव के बीच एसडीपीओ, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उधर इस कथित एनकाउंटर को लेकर आज भरत तिवारी के गांव में महापंचायत आयोजित हो रही है, जिसमें बिहार—यूपी से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। महापंचायत में मामले की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
जानकारी के अनुसार बिलौटी गांव में भरत तिवारी को एनकाउंटर में मारने के खिलाफ महापंचायत में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ-साथ कई नेता भी पहुंचे हैं। खबर है कि जनसुराज नेता प्रशांत किशोर भी इसमें शामिल हो रहे हैं। भरत तिवारी के एनकाउंटर से पहले का लाइव वीडियो सामने आने से मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम खुद हत्या के मुकदमे में आरोपी बन गई है। कई पुलिस वाले सस्पेंड और लाइन हाजिर हैं और आगे उन पुलिसवालों पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है। भरत के एनकाउंटर के बाद से अबतक सीएम सम्राट चौधरी की सरकार इस मामले में चौतरफा घिरती दिख रही है। मानवाधिकार आयोग ने जहां जवाब मांग लिया है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की याचिका दाखिल की गई है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने इस एनकाउंटर की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच का ऐलान किया था, लेकिन भरत के परिवार ने यह कहकर इसे खारिज कर दिया कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है। इस मामले में विपक्ष के साथ-साथ गठबंधन सरकार चला रही भाजपा और जदयू के मंत्री और नेता भी एनकाउंटर से भड़के हुए हैं। विदित हो कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे अपनी ‘अंतिम इच्छा’ और मोबाइल फोन का जिक्र करते नजर आते हैं। वीडियो में वे कहते हैं कि उनके जाने के बाद उनका मोबाइल केवल उनके माता-पिता के पास ही रहे, क्योंकि वही उनका अहम सबूत और जीवन का रिकॉर्ड है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता और भविष्य में इसकी अहमियत काफी अधिक होगी। इधर, भरत तिवारी की मां और बहन ने आरोप लगाया है कि कथित फर्जी एनकाउंटर के बाद पुलिस उनके बेटे का मोबाइल अपने साथ थाने ले गई है और मांगने पर भी वापस नहीं कर रही है।
खबर है कि आज के महापंचायत में अब भरत तिवारी के मोबाइल को परिजनों को सौंपने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। साथ ही इस मुद्दे को लेकर पुलिस पर दबाव बनाने की रणनीति पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भरत के मोबाइल में कई वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े कथित साक्ष्य होने की बात कही जा रही है। इसी कारण भरत तिवारी इस फोन को लेकर काफी आश्वस्त और चिंतित रहते थे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मोबाइल में वास्तव में कौन-से दस्तावेज या जानकारियां मौजूद हैं। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह फोन किसी बड़े खुलासे से जुड़ा हो सकता है, जिसे लेकर परिजनों द्वारा लगातार मोबाइल सौंपने की मांग की जा रही है।