पटना : बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। एक तरफ जहां पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने इस मामले में एनकाउंटर का पुरजोर समर्थन करते हुए इस पूरे विवाद में ‘दलित और मुसलमान’ का मुद्दा शामिल कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार (23 जून, 2026) को अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए विपक्ष और प्रदर्शनकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि दलितों का एनकाउंटर हो तो नक्सली था मारा गया, मुसलमान का एनकाउंटर हो तो आतंकवादी था मारा गया, ऐसा कहने वाले लोग ही भरत तिवारी के एनकाउंटर पर सवाल उठा रहें हैं…”
मांझी ने आगे सवाल उठाते हुए कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहां से आई? उन्होंने पूछा कि किन लोगों के शह पर इस आपराधिक वारदात पर राजनीति चमकाई जा रही है? देश संविधान से चलेगा या फिर अवैध पिस्टल की नोक से? केंद्रीय मंत्री ने भरत तिवारी का समर्थन करने वालों को ‘जातिवादी मानसिकता’ का बताया। उन्होंने दो टूक कहा, “भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था जिनका जातिवादी मानसिकता के लोग समर्थन कर रहे हैं। पूर्व में भी आपराधिक मामलों को लेकर इनकी गिरफ्तारी हो चुकी थी।”
जीतन राम मांझी के इस बयान के बाद विपक्षी खेमे से भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस घटना को सीधे तौर पर ‘हत्या’ करार दिया है। अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि मैं इस बात को पूरी तरह खारिज करता हूं कि भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ है, सच यह है कि उसकी हत्या हुई है। यह पूरी साजिश स्थानीय डीएसपी ने रची थी।”
कांग्रेस नेता ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार के सामने बड़ी मांगें रख दी हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से न कराकर, पटना हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को तुरंत 1 करोड़ रुपये की राहत राशि देने की भी मांग की है।