Patna : बिहार की सियासत में इन दिनों ‘पावरस्टार’ पवन सिंह के नाम की भारी गूंज है। MLC चुनाव में निर्विरोध चुने जाने के बाद अब सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या पवन सिंह सम्राट सरकार में मंत्री बनेंगे? इस चर्चा को हवा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान से मिली है, जिसमें उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश के सदन का सदस्य न होने पर कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना सदस्यता के 5 महीने 29 दिन तक ही मंत्री रह सकता है। इस बयान के बाद माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश को इस्तीफा देना पड़ सकता है, जिसके बाद रिक्त होने वाली जगह पर पवन सिंह के नाम की अटकलें तेज हो गई हैं।
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में आसनसोल (पश्चिम बंगाल) से टिकट मिलने के बाद पीछे हटने और काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण भाजपा से पवन सिंह के रिश्ते तल्ख हो गए थे। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें टिकट नहीं मिला। हालिया राज्यसभा चुनाव में भी उनका नाम चर्चा में था, लेकिन मौका नहीं मिला। ऐसे में भाजपा उन्हें मंत्री बनाकर उनकी पुरानी सारी नाराजगी पूरी तरह खत्म करना चाहेगी।
वहीँ, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में पवन सिंह ने एनडीए के लिए जमकर पसीना बहाया था। उनका प्रचार गीत ‘जोड़ी मोदी आ नीतीश जी के हिट होई’ जबरदस्त वायरल हुआ और एनडीए को 202 सीटों पर बंपर जीत मिली। इस जीत का एक बड़ा श्रेय पवन सिंह के जमीनी प्रभाव को दिया जा रहा है, जिसका इनाम उन्हें मिलना तय माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा की हार का कारण बनने के बावजूद भाजपा ने पवन सिंह को एमएलसी बनाकर अपने रिश्ते सुधारने का संकेत दे दिया है।
पवन सिंह को लेकर चल रही इन अटकलों के बीच राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके मंत्री बनने की संभावना बेहद कम है। इसके पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं कि 7 मई को हुए सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मौजूदा कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित कुल 32 मंत्री हैं। इनमें भाजपा के कोटे से सम्राट चौधरी समेत कुल 15 मंत्री पहले ही शपथ ले चुके हैं। यानी भाजपा के कोटे में अब कोई जगह खाली नहीं है। अगर दीपक प्रकाश सदन की सदस्यता न मिलने के कारण इस्तीफा देते हैं, तो उनकी जगह पवन सिंह को लाना आसान नहीं होगा। दीपक प्रकाश की पार्टी के पास 4 विधायक हैं।
राजनीतिक नियम और गठबंधन धर्म के मुताबिक, उनके इस्तीफे के बाद उनकी ही पार्टी के किसी विधायक को मंत्री पद सौंपा जाएगा, न कि भाजपा के किसी सदस्य को। कैबिनेट में जेडीयू कोटे से दो-तीन सीटें जरूर खाली हैं, लेकिन जेडीयू अपने कोटे की सीट भाजपा के किसी एमएलसी (पवन सिंह) को दे, इसकी संभावना न के बराबर है। भाजपा ने पवन सिंह को उच्च सदन (एमएलसी) भेजकर उनकी लोकप्रियता और चुनाव में किए गए सहयोग का सम्मान तो कर दिया है, लेकिन कैबिनेट के मौजूदा जातिगत और दलीय समीकरणों को देखते हुए फिलहाल ‘पावरस्टार’ के कंधों पर मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलना मुश्किल नजर आता है।