नवादा : नवादा जिला प्रशासन जिस डोर स्टेप डिलीवरी को अपनी उपलब्धि बता रहा है, गोविंदपुर प्रखंड में वह व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। क्षेत्र के भवनपुर जैसे दर्जनों गांवों में स्थिति ‘त्राहिमाम’ वाली है। यहाँ की विधवा महिलाओं और बुजुर्गों के लिए गैस सिलेंडर अब एक सपना बन गया है। आरोप है कि जहां आम जनता गोदाम के चक्कर काटकर थक चुकी है, वहीं रसूखदार लोगों के घरों पर रात के अंधेरे में चोरी-छिपे सिलेंडर पहुंचाए जा रहे हैं। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला अब गरीब के पेट पर लात मार रहा है।
दरअसल, जिला प्रशासन द्वारा रसोई गैस सिलेंडर का डोर स्टेप डिलीवरी का दावा सफेद झूठ से कम नहीं। कम से कम गोविंदपुर प्रखंड में तो सोलहो आने सच है। ऐसे में वैसी महिलाओं को जो बृद्ध है तथा जिनके परिजन रोटी की तलाश में घर से बाहर हैं उन्हें भोजन बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड क्षेत्र के भवनपुर गांव की विधवा महिला माधुरी देवी बताती हैं तीन माह पूर्व तक घर के पास गोविंदपुर इंडियन ऑयल एजेंसी का वाहन आता था तथा नकद भुगतान लेकर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराता था। लेकिन तीन माह से डोर स्टेप डिलीवरी बंद रहने से भोजन पर आफत है।
ऐसा इसलिए कि दो पुत्र विकलांग है जो कहीं आ जा नहीं सकता। स्वयं इतनी उम्र हो गयी है कि गैस सिलेंडर लेकर गोदाम तक पहुंच पाना संभव नहीं है। इस प्रकार की त्रासदी सिर्फ एक महिला की नहीं बल्कि कई महिलाओं की है जिनके घर गैस के अभाव में किसी प्रकार एक समय भोजन बन पा रहा है। बावजूद जिला प्रशासन डोर स्टेप डिलीवरी का दावा करते अघा नहीं रही है। हां! कुछ ऊंचे रसूख वालों के घर रात के अंधेरे में चोरी छिपे रसोई गैस अवश्य पहुंच रहा है ताकि भांडा न फूट जाय।
भईया जी की रिपोर्ट