नवादा : शीतल जल के झरने के कारण सूबे के कश्मीर के रूप में ख्यातिलब्ध नवादा का शीतल ककोलत जलप्रपात राष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। वन विभाग ककोलत जलप्रपात को एडवेंचर जोन के रूप में विकसित कर रहा है। वन विभाग की योजना ककोलत को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की है। इसके लिए यहां नेचर ट्रेल (प्राकृतिक भ्रमण पथ) और लैंड स्केपिंग (भू-सौंदर्यीकरण) का काम कराया जा रहा है। देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ककोलत में नेचर ट्रेल विकसित किया जा रहा है।
नेचर गाइड की मदद से पर्यटकों को ककोलत अभयारण्य की सैर कराये जाने की विभाग की योजना है। वन विभाग का उद्देश्य ककोलत में सालोंभर पर्यटकों का आवागमन बनाये रखने की है। सब कुछ समय पर हुआ तो होली के पहले तक ककोलत का नया लुक पर्यटकों को देखने के लिए मिल सकता है। पर्यटक यहां ककोलत जलप्रपात के साथ-साथ ककोलत अभयारण्य में प्राकृतिक भ्रमण पथ एवं भू-दृश्य सज्जा का आनंद उठा सकेंगे।
जंगलों के बीच बनाया जा रहा नेचर ट्रेल
ककोलत अभयारण्य में जंगलों व पहाड़ियों के बीच नेचर ट्रेल का निर्माण किया जा रहा है। डेढ़ किलोमीटर लंबे नेचर ट्रेल में खूबसूरत प्राकृतिक कच्चे मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। मार्ग पर लाल रंग का छोटा-छोटा गोलीनुमा मोरम बिछाया जा रहा है। इन सब का काम अंतिम चरण में है। बीच में आने वाले झरने के ऊपर एक ब्रिज (पुल) का निर्माण कार्य कराया जाना है। अगले एक माह में इन सबके तैयार हो जाने की योजना है।
ककोलत एडवेंचर जोन में जाने के लिए पर्यटकों के लिए नेचर गाइड की व्यवस्था की जा रही है जो पर्यटकों को ककोलत के इतिहास से रूबरू करायेंगे। नेचर ट्रेल में पर्यटकों के ठहराव की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यक्तानुसार टेंट की व्यवस्था की जाएगी। इसका विस्तृत रोड मैप तैयार किया जा रहा है।
ककोलत का किया गया रहा है भू-सौंदर्यीकरण
ककोलत का भू-सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। ककोलत के भीतर की जगह को पूरी तरह से पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। ककोलत पाथ वे के पक्कीकरण का काम अंतिम चरण में है। वहीं पार्क में फूल-पौधे व बगीचा आदि का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही इसमें कई अन्य अतिरिक्त गतिविधियों की संरचना की जा रही है। गजीबो, सीटिंग प्लेस, टॉयलेट, वाटर पार्क आदि विकसित किये जा रहे हैं। ककोलत के भीतर की जगह पर्यटकों को बेहद खूबसूरत लुक देने जा रही है ताकि पर्यटक यहां सर्दियों में आकर भी प्रकृति की गोद में बैठने का सुख प्राप्त कर सकें।
वन विभाग की योजना पर्यटकों को सालों भर ककोलत में आकर्षित करने की है। आवश्यक्तानुसार गेस्ट हाउस में ठहराव तथा अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन चल रहा है। बुद्ध सर्किट से जोड़ने की योजना:- ककोलत को बुद्ध सर्किट पर्यटन से जोड़ने की वन विभाग की आगामी योजना है। जिससे बोधगया व राजगीर आने वाले पर्यटक ककोलत घूमने आ सकें। ककोलत के जंगलों को उसी अनुरूप निखारा जा रहा है ताकि पर्यटक यहां नेचर वाक का आनंद ले सकें। इसके लिए वन विभाग ट्रायल के तौर पर नेचर ट्रेल और लैंड स्केपिंग आदि की योजना बना रहा है।
इस ट्रायल के सफल होने पर पायलट बेसिस पर इसे सरकार की मदद से विकसित किया जा सकेगा। इसी अनुरूप ककोलत की बुकिंग ऑनलाइन करने व राजगीर टूर पैकेज में पैकेजिंग पर विचार किया जा रहा है। ककोलत कुंड का जीर्णोद्धार कर इसे आकर्षक बनाया जा रहा है। बता दें कि 03 अगस्त 2024 को सीएम नीतीश कुमार ने 16 करोड़ की लागत से निर्मित ककोलत में पर्यटकीय सुविधाओं का लोकार्पण किया था। गर्मियों में यहां 20 हजार से अधिक पर्यटक एक दिन में जुटते हैं।
कहते हैं अधिकारी:-
वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रेष्ठ कृष्ण ने कहा कि ककोलत में नेचर ट्रेल और लैंडस्केपिंग का काम ट्रायल बेसिस पर किया जा रहा है। इसे होली तक शुरू किये जाने की योजना है। इसकी सफलता के बाद राजस्व के अनुरूप इसे पायलट बेसिस पर विकसित किया जाएगा। कैम्पिंग, माउंटेनिंग आदि की व्यवस्था की जाएगी। ककोलत को राजगीर टूर पैकेज से जोड़ने की योजना है।
- भईया जी की रिपोर्ट