नवादा : जिले के अकबरपुर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक झोला छाप डॉक्टर ने इलाज के नाम पर 3 साल के बच्ची की जान ले ली। मामला अकबरपुर थाना क्षेत्र के पचरूखी गांव का बताया जा रहा है। घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया है, जबकि आरोपी डॉक्टर फरार बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार अकबरपुर के पचरूखी गांव निवासी दिनेश रविदास की 3 साल की बच्ची की पीठ में ट्यूमर था। परिवार उसे दिखाने गांव के ही कथित डॉक्टर बबलू कुमार के पास पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर भरोसा दिलाया कि वह बच्ची का इलाज कर देगा और सब ठीक हो जाएगा। इसके बाद उसने अपने घर पर ही बच्ची का ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
घर में किया ऑपरेशन, सुई लगाने के बाद नहीं आया होश
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने बिना किसी जांच या उचित व्यवस्था के बच्ची को इंजेक्शन दिया और ऑपरेशन जैसा इलाज शुरू कर दिया। सुई लगाने के बाद बच्ची बेहोश हो गई और उसे होश नहीं आया। हालत बिगड़ने पर परिजन बच्ची को अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
बिना चेकअप के अस्पताल से भेजा घर
परिजनों का आरोप है कि कथित डॉक्टर ने न तो कोई मेडिकल जांच की और न ही ऑपरेशन के लिए जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। इलाज के बाद भी सही निगरानी नहीं की गई और बच्ची को घर भेज दिया गया। बाद में उसकी हालत गंभीर हो गई और उसकी जान चली गई।
ग्रामीणों में गुस्सा, आरोपी डॉक्टर फरार
घटना की खबर फैलते ही गांव में लोगों का गुस्सा भड़क उठा। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। आक्रोश को देखते हुए आरोपी झोला छाप डॉक्टर बबलू कुमार मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
बड़ा सवाल बिना डिग्री ऑपरेशन कैसे?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना मेडिकल डिग्री कोई व्यक्ति ऑपरेशन कैसे कर सकता है?
बिना ऑपरेशन थिएटर के घर में सर्जरी कैसे की गई?
ग्रामीण इलाकों में झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों क्षेत्रों में झोला छाप डॉक्टरों का नेटवर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में लापरवाही ही नहीं, बल्कि यह सीधा आपराधिक कृत्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग मजबूरी या जानकारी के अभाव में झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता के अभाव में ऐसे फर्जी डॉक्टर सक्रिय रहते हैं, जिससे कई बार जानलेवा घटनाएं हो जाती हैं।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और फर्जी डॉक्टरों पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में कब तक कार्रवाई होती है और ऐसे जानलेवा इलाज पर रोक कब लगेगी।
भईया जी की रिपोर्ट