– लोक सभा अध्यक्ष ने विधानमंडलों में घटती गरिमा पर जताई चिंत
पटना : लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने विधानमंडलों में गरिमा और मर्यादा में आ रही कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की मूलभूत जिम्मेदारी है। विधायिका लोकतंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है और इसकी शुचिता, मर्यादा एवं अनुशासन का संरक्षण आवश्यक है।
श्री बिरला आज बिहार विधान सभा के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित “सशक्त विधायक, सशक्त लोकतंत्र” विषयक व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विधायी कार्यवाहियों में व्यवधान, शोर-शराबा और अमर्यादित आचरण की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने संवाद, तर्कसंगत बहस और रचनात्मक आलोचना को लोकतंत्र की आत्मा बताया।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि रचनात्मक आलोचना नीतियों और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए तथा जनकल्याण की भावना से प्रेरित होनी चाहिए। संसदीय अनुशासन और सकारात्मक आलोचना पर आधारित सार्थक विधायी निगरानी से ही लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि सशक्त विधायक ही सशक्त लोकतंत्र की नींव होते हैं। लोकतंत्र की मजबूती निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्षमता, दक्षता और सत्यनिष्ठा पर निर्भर करती है। विधायक को शक्ति जनता के विश्वास से प्राप्त होती है और वह जनता की समस्याओं को सदन के माध्यम से उठाकर लोकतंत्र को सुदृढ़ करता है। नैतिक आचरण, उत्तरदायित्व और जवाबदेही से ही विधायकों का सशक्तीकरण संभव है।
संवैधानिक जागरूकता पर बल देते हुए श्री बिरला ने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं का समुचित ज्ञान विधायकों की विश्वसनीयता बढ़ाता है। नियमों की जानकारी से विधायक सदन में अधिक प्रभावी हस्तक्षेप कर सकते हैं तथा वाद-विवाद, चर्चाओं और समिति कार्यों के माध्यम से शासन की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसकी रक्षा सदन के भीतर और बाहर सिद्धांतपरक आचरण से की जानी चाहिए। ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि नीतियों और विधायी पहलों में महिलाओं और युवाओं की आकांक्षाओं को शामिल करना अनिवार्य है। समावेशी विकास के लिए उनकी समस्याओं का समाधान आवश्यक है।
इस अवसर पर श्री बिरला ने बिहार विधानमंडल में राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) डिजिटल हाउस का उद्घाटन भी किया। उन्होंने इसे पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि डिजिटलीकरण से अभिलेखों तक पहुंच आसान होती है, शोध क्षमता बढ़ती है और कागज पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने विधायकों से डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का आग्रह किया तथा ‘एक राष्ट्र, एक विधायी मंच’ की परिकल्पना को साकार करने की बात कही। बिहार की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि प्राचीन बिहार में विकसित सामूहिक विमर्श और सहभागितापूर्ण शासन की परंपराओं ने भारत की संसदीय व्यवस्था को वैचारिक आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार राजनीतिक चिंतन और नेतृत्व का ऐतिहासिक केंद्र रहा है और इस विरासत की रक्षा करना जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू, राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश, बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा तथा बिहार सरकार के संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी ने भी अपने विचार रखे। बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्वागत भाषण में कहा कि स्थापना दिवस बिहार की लोकतांत्रिक चेतना और संसदीय परंपराओं की निरंतर यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने सदन को समाधान, सहमति और जनकल्याण का मंच बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष श्री नरेंद्र नारायण यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।