Patna : केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी जीत मिली है। पटना हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ गया में दर्ज आठ साल पुराने आपराधिक मामले को पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए मंत्री सुमन को बड़ी राहत दी है।
दरअसल, अप्रैल 2017 में मंत्री संतोष कुमार सुमन के खिलाफ गया के बोधगया थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर आरोप थे कि उन्होंने कि उन्होंने गैरकानूनी भीड़ इकट्ठा की और सड़क जाम किया, सार्वजनिक उपद्रव फैलाया और लोगों पर हमला किया और साथी ही सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डाली।
सुनवाई के दौरान संतोष कुमार सुमन के वकीलों (वरिष्ठ अधिवक्ता दीनू कुमार और वरदान मंगलम) ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल केवल एक सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहे थे। एफआईआर केवल राजनीतिक द्वेष और परेशान करने की नीयत से दर्ज की गई थी। भाषण देने को गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया।
वहीँ, संतोष सुमन के वाकिन ने कहा कि एफआईआर के तथ्यों को पढ़ने मात्र से कोई गंभीर अपराध सिद्ध नहीं होता। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील झारखंडी उपाध्याय ने याचिका का विरोध किया, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को अधिक वजनदार माना। उसके बाद न्यायमूर्ति संदीप कुमार की पीठ ने माना कि मंत्री सुमन के खिलाफ लगाए गए आरोप इतने पुख्ता नहीं हैं कि उनके आधार पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखी जाए।
कोर्ट ने बोधगया थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) और उससे जुड़ी पूरी कानूनी प्रक्रिया को रद्द (Quash) करने का आदेश दिया। मंत्री संतोष कुमार सुमन के लिए यह फैसला राजनीतिक संजीवनी की तरह है। विपक्ष अक्सर उनके खिलाफ लंबित मामलों को लेकर घेराबंदी करता रहा है, ऐसे में हाई कोर्ट की यह क्लीन चिट उनकी छवि को मजबूती देगी।