पटना : पावन माघी पूर्णिमा के अवसर पर राजधानी पटना से सटे चर्चित बाढ़ अनुमंडल में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उत्तरवाहिनी गंगा नदी में स्नान, दान एवं पूजा-अर्चना के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 31 जनवरी से 1 फरवरी की देर शाम तक श्रद्धालु गंगा स्नान कर समीपवर्ती मंदिरों में पूजा-अर्चना करते रहे। माघी पूर्णिमा पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने सुविख्यात उमानाथ, अलखनाथ, बनारसी घाट, बाल शनिधाम, गौरीशंकर, पोस्ट ऑफिस घाट सहित अन्य घाटों पर उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाई। शास्त्रों एवं पुराणों में माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान और पूजा-अर्चना को विशेष पुण्यदायी बताया गया है।
हालांकि, मेले में आए श्रद्धालुओं को गंगा घाट तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सदर बाजार स्थित गोपीनाथ मंदिर से उमानाथ मंदिर जाने वाले मार्ग पर भवन निर्माण सामग्री (गिट्टी-बालू) जमा रहने के कारण रास्ता बाधित रहा। वहीं उमानाथ मंदिर घाट के समीप मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने से श्रद्धालुओं को संकरी गलियों से होकर घाट और मंदिर तक जाना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि माघी पूर्णिमा के अवसर पर प्रशासनिक दिशा-निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की गई। बिना सरकारी अनुमति के नावों का परिचालन किया गया तथा मेला के नाम पर नगर परिषद क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बाढ़ प्रखंड क्षेत्र में भी वाहनों से मनमाने ढंग से अवैध वसूली किए जाने के आरोप लगे।
सूत्रों के अनुसार, कई लोग सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई के नाम पर केवल फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर सक्रिय दिखे, लेकिन वास्तविक व्यवस्था के समय उनका कहीं पता नहीं चला। परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं को पूरे मेले के दौरान अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। माघी पूर्णिमा मेले में फैली कु-व्यवस्था, अवैध वसूली और लूट-खसोट की तस्वीरें कई लोगों ने अपने कैमरों में कैद की हैं। वहीं, अव्यवस्था की पोल खुलने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट