पटना : पटना जिला पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। हत्या, लूट और रंगदारी समेत 22 संगीन मामलों में वांछित कुख्यात अपराधी राजीव गोप को मोकामा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसकी गिरफ्तारी से दानापुर रेल मंडल एवं पटना जिला ग्रामीण क्षेत्रों में फैले उसके आतंक पर लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुलिस ने यह कार्रवाई एक हालिया रंगदारी मामले की जांच के दौरान की। मोकामा थाना कांड संख्या 41/26 के तहत दर्ज मामले में राजीव गोप पर 26 जनवरी की रात मोलदियार टोला निवासी सिद्धार्थ उर्फ सिद्धू से 25 हजार रुपये की रंगदारी मांगने, मारपीट करने और रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पीड़ित की मां रंजना कुमारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
लल्लू मुखिया का करीबी होने का दावा
बाढ़ एसडीपीओ-1 आनंद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार अपराधी राजीव गोप का सीधा संबंध कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया से रहा है। उन्होंने बताया कि लल्लू मुखिया पूर्व में बाढ़ विधानसभा से राजद के प्रत्याशी रह चुके हैं और राजीव गोप ठेकेदारी समेत अन्य गतिविधियों में उनका सक्रिय सहयोगी था।
22 से अधिक मुकदमों का लंबा आपराधिक इतिहास
एसडीपीओ-1 ने बताया कि राजीव गोप एक संगठित अपराधी गिरोह का हिस्सा रहा है। उस पर सिर्फ मोकामा थाना क्षेत्र में ही 22 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, रंगदारी और फिरौती के लिए अपहरण जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। वह लंबे समय से फरार था और उसके खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट भी जारी था।
विशेष टीम गठित कर की गई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, थानाध्यक्ष कुणाल कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने 29 जनवरी की रात राजीव गोप के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। करीब दो घंटे की घेराबंदी और मशक्कत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
अन्य जिलों में भी नेटवर्क की जांच
एसडीपीओ आनंद कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस अब राजीव गोप के पूरे आपराधिक नेटवर्क को खंगाल रही है। पटना जिला के अलावा आसपास के जिलों के थानों को भी उसकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी गई है, ताकि अन्य लंबित मामलों में उसे रिमांड पर लिया जा सके। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और क्षेत्र में रंगदारी व आतंक का खेल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट