पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदरूनी कलह ने विस्फोटक रूप ले लिया है। पार्टी के कद्दावर नेता और वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने आरजेडी के ‘ऑल इज वेल’ के दावों की पोल खोलकर रख दी है। भाई वीरेंद्र ने रोहतास की दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान सिटिंग विधायक की अनदेखी की गई “जब अंत में यादव उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो रोहतास की दिनारा सीट से सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया? उनमें क्या कमी थी?” विधायक ने दावा किया कि उन्होंने विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए अंत तक लड़ाई लड़ी थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। और उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के उन रणनीतिकारों पर हमला बोला जो टिकट तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय और जमीन से जुड़े नेताओं को किनारे कर दूसरे जिलों से आए लोगों को टिकट थमाया गया। पार्टी में कुछ ऐसे नेता हैं जो ‘नाम के समाजवादी’ हैं और एक साथ कई जिलों की राजनीति को नियंत्रित करते हैं। जब तक ऐसे लोगों के इशारे पर टिकट बंटेंगे, पार्टी का यही हश्र होगा। मालूम हो कि 2020 के चुनाव में विजय मंडल ने एलजेपी के कद्दावर नेता राजेंद्र सिंह को करीब 8228 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी।
वहीँ, 2025 में पार्टी ने उनका पत्ता काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को मैदान में उतारा। नतीजे उम्मीद के उलट रहे और पार्टी को यह सीट गंवानी पड़ी। भाई वीरेंद्र का मानना है कि यह हार नेतृत्व की गलत रणनीति का सीधा नतीजा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद आरजेडी नेतृत्व ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाकर अपना बचाव कर रहा था, लेकिन अब खुद पार्टी के वरिष्ठ विधायक ने “भीतरघात और गलत चयन” को हार की असली वजह बताकर पार्टी की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।