पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की रहने वाली छात्रा की संदिग्ध हालात में हुई मौत की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस सनसनीखेज कांड की सात दिनों की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट बिहार पुलिस मुख्यालय को सौंप दी है। यह रिपोर्ट बिहार पुलिस के DGP को पेश की गई है। अब SIT की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा तय की जाएगी। बिहार की सियासत और पुलिस महकमे को हिला देने वाला यह मामला काफी उलझा हुआ है। रिस्थिति जन्य सबूत तथा संदिग्धों के बयान के अलावा छात्रा की मौत से कुछ दिन पहले की गतिविधियां परस्पर विरोधाभासी रही हैं। ऐसे में देखना है कि SIT ने छात्रा की मौत की बजह सेक्सुअल असॉल्ट बताई है या फिर योजनाबद्ध तरीके से की गई साजिशन हत्या।
SIT रिपोर्ट में गवाहों के बयान और तकनीकी सबूत
सूत्रों के अनुसार डीजीपी को सौंपी गई SIT रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े लगभग हर संभावित गवाह के बयान और सबूत शामिल हैं। इसमें अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मैनेजमेंट, छात्रा के परिवार के सदस्यों, हॉस्टल में रहने वाली अन्य छात्राओं, हॉस्टल के मैनेजमेंट और स्टाफ, पड़ोसियों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों आदि के बयान शामिल हैं। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन डेटा, डिजिटल डेटा और फोरेंसिक इनपुट भी रिपोर्ट का हिस्सा हैं। SIT ने शंभू गार्ट्स हॉस्टल के फिजिकल स्ट्रक्चर, कमरों की हालत और तीनों गेट, खासकर पिछले गेट और लिंक रोड से उसके कनेक्शन को भी अपनी जांच में शामिल किया है। मकसद यह पता लगाना है कि यह घटना हॉस्टल के किस कमरे या हिस्से में हुई और उस समय वहां कौन-कौन मौजूद था।
CCTV फुटेज से छात्रा की मूवमेंट टाइमलाइन बनाई
SIT ने छात्रा के मूवमेंट की एक विस्तृत टाइमलाइन तैयार की है। जांच में पटना जंक्शन से शंभू गर्ल्स हॉस्टल तक के CCTV फुटेज, हॉस्टल के अंदर और आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग और जहानाबाद में छात्रा के घर से रेलवे स्टेशन तक लगे 40 से ज्यादा CCTV कैमरों के फुटेज की समीक्षा की गई। इस फुटेज के आधार पर छात्रा की यात्रा, हॉस्टल पहुंचने का समय और उसके बाद की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना आई और दोपहर करीब 3:35 बजे शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। अगले दिन, 6 जनवरी को, वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और दोपहर में बेहोश पाई गई। उसे पहले कंकड़बाग के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, फिर प्रभात मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे 9 जनवरी को मेदांता अस्पताल रेफर किया गया, जहां 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस की लापरवाही और पोस्टमार्ट रिपोर्ट का हवाला
शुरुआती जांच में पुलिस ने क्राइम सीन, CCTV फुटेज और शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार कर दिया था। लेकिन PMCH की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस नतीजे पर गंभीर सवाल उठाए। इसमें साफ कहा गया कि यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शरीर पर चोट के निशान और जबरदस्ती यौन संपर्क के संकेत मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद, छात्रा के पिता ने चित्रगुप्त नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। SIT ने मुख्य रूप से इसपर फोकस रखा कि 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना की यात्रा के दौरान छात्रा की मानसिक और शारीरिक हालत कैसी थी? हॉस्टल पहुंचने के बाद ऐसा क्या हुआ कि वह शाम को बेहोश हो गई, जबकि कथित तौर पर वह पूरे दिन नॉर्मल थी। जांच में छात्रा के मोबाइल कॉल पैटर्न को भी शामिल किया गया है, जिसमें एक खास नंबर पर बार-बार संपर्क दिखाया गया है।