पटना : बिहार की नदियों में अब पारंपरिक लकड़ी की नावों का दौर जल्द ही खत्म होने वाला है। राज्य सरकार ने जल परिवहन को सुरक्षित, आधुनिक और किफायती बनाने के लिए एक ‘गेमचेंजर प्लान’ तैयार किया है। इसके तहत पटना स्थित राष्ट्रीय जलमार्ग संस्थान (निनि) अब अपने छात्रों को फाइबर प्रबलित प्लास्टिक (FRP) की नावें बनाने का विशेष प्रशिक्षण देगा। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार के गायघाट निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट निदेशक इंद्रजीत सोलंकी ने बताया कि इस साल के अंत तक FRP नाव निर्माण की ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी।
इन नावों की विशेषताएं कुछ इस प्रकार हैं कि लगभग 10 मीटर लंबी इन नावों में 25 से 30 लोग एक साथ सफर कर सकेंगे। लकड़ी की नावों की तुलना में इन्हें बहुत कम मेंटेनेंस की जरूरत होती है। एक बार तैयार होने के बाद, इन नावों को अगले 10 सालों तक मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।ट्रेनिंग प्राप्त छात्र स्वयं का नाव निर्माण स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने गायघाट से दीघा तक वाटर मेट्रो वेसल में सफर कर जलमार्ग की संभावनाओं को परखा। उन्होंने कहा कि सड़क और रेल की तुलना में जल परिवहन न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। जलमार्ग के जरिए बालू, सब्जी और भारी माल की ढुलाई आसान होगी। इससे मुख्य सड़कों पर लगने वाले भारी जाम और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। बिहार में जलमार्ग का विस्तार सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के जरिए बिहार अब कोलकाता और हल्दिया जैसे बड़े बंदरगाहों से मजबूती से जुड़ रहा है। भागलपुर से विराटनगर (नेपाल) के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए नए अंतरराज्यीय टर्मिनल बनाने की योजना है।
जलवाहक योजना के तहत अनुदान के लिए दूरी की सीमा 300 किमी से घटाकर 100 किमी करने का प्रस्ताव है, जिससे बक्सर, पटना, मोकामा और भागलपुर जैसे शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। वर्तमान में बिहार की नदियों पर करीब 1550 घाट हैं और 6600 से अधिक पंजीकृत नावें संचालित हो रही हैं। सरकार का मानना है कि लकड़ी की पुरानी नावों को आधुनिक FRP नावों से बदलने और जलमार्गों को विकसित करने से बिहार की अर्थव्यवस्था को एक नया और मजबूत आधार मिलेगा।