गया : बिहार के गया जिले से प्रशासन की घोर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर निगम के वार्ड संख्या 34 की पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। यह मामला तब और भी गंभीर हो जाता है जब यह पता चलता है कि जिस पार्षद के पास अपने वार्ड के लोगों के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के सत्यापन की जिम्मेदारी है, आज वह खुद को जीवित साबित करने के लिए तख्ती लेकर संघर्ष कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, गेवाल बिगहा स्थित अपने आवास पर व्यथित दिखीं पार्षद शीला देवी ने बताया कि उनके पति के निधन के बाद पिछले 18 वर्षों से उन्हें नियमित रूप से विधवा पेंशन मिल रही थी। नवंबर 2025 तक उनके खाते में पेंशन की राशि आती रही, लेकिन दिसंबर से अचानक भुगतान रुक गया। उन्होंने बताया कि जब वो पेंशन रुकने की वजह जानने के लिए वसुधा केंद्र पर केवाईसी कराने पहुंचीं, तो वहां के कर्मियों ने उन्हें जो बताया उसे सुनकर वह दंग रह गईं। सरकारी पोर्टल पर उन्हें ‘मृत’ दर्ज कर दिया गया था। इसी वजह से उनकी पेंशन और अन्य सरकारी लाभों पर रोक लगा दी गई है।
पार्षद शीला देवी ने प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए हाथों में तख्ती लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “जो अधिकारी दफ्तर की मेज पर बैठकर बिना किसी जमीनी जांच के लोगों को मृत घोषित कर देते हैं, उनकी इस लापरवाही ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। एक जनप्रतिनिधि के साथ जब ऐसा हो सकता है, तो आम जनता का क्या होता होगा?” इस घटना ने गया नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं?