पटना : राजधानी पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की मौत का मामला गहराता जा रहा है। घटना के करीब दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) के हाथ अब तक खाली हैं। इस देरी ने न केवल मृतका के परिजनों बल्कि आम जनता के बीच भी आक्रोश पैदा कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है और असली दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। अब लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले में सरकार की चुप्पी और पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली को “दिशाहीन जांच” करार दिया।
लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट में लिखा कि घटना को पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन पुलिस अब भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस हर दिन एक नई कहानी गढ़कर लोगों को भ्रमित कर रही है। रोहिणी ने सीधे तौर पर हॉस्टल संचालकों, निजी अस्पतालों (सहज सर्जरी और प्रभात मेमोरियल) के डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए।
वहीँ उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य के मुखिया मौन हैं और गृह मंत्री सिर्फ औपचारिक बयानबाजी कर रहे हैं। ये लोग मामले को लंबा खींचकर ठंडा करने की कोशिश में है। उन्होंने लिखा, “ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार सरकार और पुलिस जांच की दिशा को भटकाकर मामले की लीपापोती करना चाहती है और किसी बड़े दबाव के कारण आरोपियों को बचा रही है।”
मालूम हो कि जहानाबाद की एक छात्रा जो पटना के निजी शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। गर्ल्स हॉस्टल वालों के साथ ही पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन उसी समय से परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है और इसमें हॉस्टल प्रबंधन की संलिप्तता है। शुरुआत से ही पुलिस की भूमिका और निजी अस्पतालों द्वारा दी गई सूचनाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्तमान में जनता के बीच पुलिस के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है। अब सबकी नजरें SIT की अगली रिपोर्ट और सरकार के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं।