पटना : बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों में हो रही देरी और अनियमितता को लेकर राज्य सरकार ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि दाखिल-खारिज के मामलों को जान-बूझकर लंबित रखना अब ‘कर्तव्यहीनता’ और ‘नागरिक अधिकारों से खिलवाड़’ माना जाएगा।
‘स्वतः आपत्ति’ दर्ज करना अब कदाचार की श्रेणी में
विभाग के सचिव श्री जय सिंह द्वारा सभी जिलाधिकारियों (DM) को जारी पत्र में कहा गया है कि अंचल स्तर पर कई मामलों में बिना किसी ठोस आधार के ‘स्वतः आपत्ति दर्ज कर दी जाती है। विभाग ने इसे नियमों के विरुद्ध और ‘कदाचार’ (Misconduct) घोषित किया है।
आम-खास सूचना जारी होने के 14 दिनों के भीतर यदि कोई वैध आपत्ति नहीं आती है, तो अंचल अधिकारी (CO) को तत्काल आदेश पारित करना अनिवार्य है। सरकारी खाता या खेसरा से संबंधित भूमि होने पर ही संतुष्टि के आधार पर स्वतः आपत्ति दर्ज की जा सकती है। बिना किसी वैधानिक हित के झूठी आपत्ति दर्ज कराने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
लापरवाही नहीं, व्यवस्था के विरुद्ध अपराध
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दाखिल-खारिज समय पर न होने से रैयतों के भू-अभिलेख अद्यतन नहीं हो पाते। इसके कारण किसान और भू-स्वामी सरकारी योजनाओं, बैंक लोन और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है। टाल-मटोल वाली नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
जवाबदेही तय: होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने चेतावनी दी है कि:
1. जिन अंचलों में अकारण लंबित मामलों की संख्या अधिक मिलेगी, वहां के अंचल अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
2. दाखिल-खारिज की प्रक्रिया बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 और संशोधित नियमावली, 2020 के तहत निर्धारित समय-सीमा में पूरी करनी होगी।
पारदर्शिता की उम्मीद
इस सख्त कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग का लक्ष्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और आम नागरिकों को न्यायसंगत सेवा प्रदान करना है।