अरवल -अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, वह केवल अवसर की तलाश में रहती है। अरवल जिले के एक सुदूर ग्रामीण से निकले रतिकेश पूर्णोदय ने इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है। दिल्ली के ऐतिहासिक गलियारों में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में रतिकेश ने अपनी वाक-पटुता और वैचारिक प्रखरता से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जब उन्होंने मंच से अपनी बात रखी, तो मानो बिहार की समूची बौद्धिक विरासत जीवंत हो उठी। प्रधानमंत्री जी के समक्ष अपनी वक्तृत्व कला का लोहा मनवाकर रतिकेश ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो गाँव की पगडंडियों से निकलकर देश की संसद और नीति-निर्धारण के मंचों तक पहुँचा जा सकता है।
बिहार के परचम को मिली नई ऊँचाई
रतिकेश पूर्णोदय की इस सफलता ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित संवाद में बिहार का प्रतिनिधित्व करना और अपनी अमिट छाप छोड़ना, उनकी कड़ी मेहनत और अटूट लगन का परिणाम है।
रतीकेश पूर्णोदय
“मेरे लिए यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अपने राज्य की आशाओं और आकांक्षाओं को देश के सर्वोच्च नेतृत्व के सामने रखने का एक माध्यम था।
भविष्य के ‘यंग लीडर’ के रूप में उभरे रतिकेश
उनकी इस उपलब्धि पर अरवल में जश्न का माहौल है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रतिकेश ने न केवल अपना, बल्कि अपने माता-पिता और पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।यह उपलब्धि आने वाले समय में जिले के हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि का युवा अपनी मेधा के बल पर राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकता है।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट