नवादा : पूरा बिहार कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहा है। कई जिलों के स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गईं, लेकिन नवादा में बच्चे सर्द मौसम में स्कूल जाने को मजबूर हैं। वजह है सोता हुआ प्रशाासन। यहां किसी भी अधिकारी ने भीषण ठंड में स्कूल जाते बच्चों की सुध नहीं ली। आंगनबाड़ी से लेकर सभी कक्षाओं के स्कूल रोजाना खुल रहे हैं।
सर्दी की वजह से माता-पिता से लेकर बच्चे सभी परेशान हैं। सर्द हवाओं और गिरते तापमान को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियातन कई जिलों में 11 जनवरी तक स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया है, ताकि बच्चों की सेहत पर कोई विपरीत असर न पड़े, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नवादा बिहार का इकलौता जिला बन गया है, जहां यह आदेश जमीन पर लागू होता नजर नहीं आ रहा।
रोजाना खुल रही आंगनबाड़ी
जिले में सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी रोजाना खुल रहे हैं। सुबह-सुबह ठंड में ठिठुरते छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई जगहों पर बच्चों के पास ठंड से बचने के लिए न तो पर्याप्त कपड़े हैं और न ही जूते-मोजे। ऐसे में स्कूल पहुंचने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। परेशानी सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। अभिभावक भी बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि सरकार ने जब पूरे बिहार में स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है, तो नवादा को इससे अलग क्यों रखा जा रहा है? कई माता-पिता का आरोप है कि ठंड के कारण उनके बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें स्कूल भेजना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूलों में हालात खराब
सबसे ज्यादा खराब स्थिति सरकारी स्कूलों की बताई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले कई बच्चे बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। ठंड से बचाव के लिए उनके पास गर्म कपड़े तक नहीं हैं। ऐसे हालात में भी वे रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति जिला प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक जिला प्रशासन की ओर से स्कूल बंद करने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया जा रहा है। फिलहाल दस बजे से तीन बजे तक विद्यालय संचालित किया जा रहा है।
भईया जी की रिपोर्ट