तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोज करायेंगे। वे इस भोज में अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी न्योता देंगे। अगर ऐसा होता है तो पार्टी और परिवार से तेज प्रताप के निष्कासन के एक लंबे अरसे बाद लालू यादव के दोनों बेटों के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी। यह बात तेज प्रताप यादव ने खुद ही कही है। तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को भी निमंत्रण देंगे। तेज प्रताप यादव ने बताया कि यह मौका सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है। इस दिन पक्ष—विपक्ष, साथी और विरोधी सभी आपसी मनमुटाव और विचारधारा को अलग रख कर सामाजिक सौहार्द निभाते हैं।
लेकिन राजनीतिक हलकों में इस खबर ने अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक विश्लोषकों का कहना है कि इस पहले के जरिये लालू परिवार में तेज प्रताप की फिर से एंट्री की जमीन तैयारी की जा रही है। दोनों भाई सीधे मुंह काफी दिनों से बातचीत नहीं कर रहे। इन्हीं परिस्थितियों में हुए विधानसभा चुनाव में राजद की बुरी हार हुई। तेज प्रताप भी इस चुनाव में अपनी सीट गंवाने के साथ ही औंधे मुंह गिरे। इस सबके बीच लालू परिवार की तब और किरकिरी होने लगी जब उन्हें किडनी देने वाली बेटी रोहिणी भी तेजस्वी पर गंभीर आरोप लगाते हुए परिवार से अलग हो गई। ऐसे में लालू यादव चाह रहे कि परिवार में एकजुटता हो और सभी इस मुश्किल समय में एकजुट होकर पार्टी और परिवार की मजबूती के लिए काम करें। हाल में तेज प्रताप ने अपनी मां राबड़ी देवी के जन्मदिन पर उनसे मिलकर भावुक बातें कही थी। ऐसे में तेज प्रताप की दही—चूड़ा वाली इस खुलासे ने इन सियासी सवालों को उछाल दिया कि आखिर लालू परिवार में मकर संक्रांति के अवसर पर क्या खिचड़ी पक रही है?
गौरतलब है कि बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा का भोज होता रहा है। बिहार के तमाम दिग्गज नेता इस भोज का आयोजन करते रहे हैं। राजद, जदयू के दिग्गज नेताओं की तरफ से यह आयोजन होता रहा है। राबड़ी आवास पर भी हर साल बड़ा आयोजन मकर संक्रांति के मौके पर होता रहा है। तेजप्रताप यादव उसी परंपरा को बढ़ाने के प्रयास में हैं। विदित हो कि तेजप्रताप यादव ने हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजद से अलग होकर अपनी अलग पार्टी का गठन किया था। चुनाव में कई सीटों पर उन्होंने अपने उम्मीदवार भी उतारे थे। बिहार की राजनीति में लालू यादव की विरासत को लेकर भी यह चर्चा होती रही है कि तेजप्रताप और तेजस्वी में कौन उसे आगे मजबूती से बढ़ाएगा। हालांकि लालू यादव की पार्टी राजद की कमान अब तेजस्वी यादव के हाथ में है। ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि तेजप्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में कितनी राजनीतिक खिचड़ी पकती हैं।