पटना : साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार के तत्वावधान में तथा राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), पटना, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BCST), पटना एवं श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र, पटना की सहभागिता से आयोजित द्वितीय राज्य स्तरीय बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम 2025 का भव्य समापन आज श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र, पटना के सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
यह राज्य स्तरीय आयोजन 30 एवं 31 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से चयनित बाल वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी बाल वैज्ञानिकों ने विज्ञान, समाज और नवाचार से जुड़े अपने शोधपरक प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। समापन सत्र में बाल वैज्ञानिकों एवं उनके मार्गदर्शक शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए।
राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन के उपरांत सर्वोत्तम 30 बाल वैज्ञानिकों की परियोजनाओं का चयन किया गया। चयनित परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, तकनीकी नवाचार तथा सामाजिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित रहीं। समापन सत्र का मंच संचालन डॉ. कुमारी निमिषा ने किया, जबकि कार्यक्रम का प्रतिवेदन श्री दीपक कुमार, सचिव, साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) एस.के. वर्मा, माननीय कुलपति, बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय, पटना ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम विद्यार्थियों में नवाचार, तार्किक सोच और अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने का सशक्त माध्यम है।विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) संजय कुमार, उपनिदेशक (प्रशिक्षण), SCERT, पटना ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यालय स्तर पर विज्ञान एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कार्यक्रम में श्रीनू अप्पिकोंडा, परियोजना निदेशक, श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र, पटना ने विज्ञान केंद्रों की भूमिका को बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) राजमणि प्रसाद, पूर्व कुलपति ने की। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम बच्चों को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़कर वैज्ञानिक समाधान खोजने की दिशा देता है और यह भविष्य के वैज्ञानिक नागरिक तैयार करने की मजबूत आधारशिला है।
इस अवसर पर साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि संस्था का निरंतर प्रयास है कि विज्ञान प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर गांव, विद्यालय और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। वहीं उपसभापति प्रो. (डॉ.) डॉली सिन्हा ने बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम को बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और अनुसंधान क्षमता को निखारने का सशक्त मंच बताया तथा बालिकाओं की बढ़ती सहभागिता को प्रेरणादायक कहा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में राज्य समन्वयक डॉ. चंद्रशेखर झा एवं क्षेत्रीय समन्वयक हर्षवर्धन कुमार, कृष्ण कुमार और मनोज कुमार की सक्रिय भूमिका रही। अंत में चयनित बाल वैज्ञानिकों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए तथा डॉ. संदीप दफ्तवार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर संगीता कुमारी, मनोज कुमार, उमेश कुमार सहित अनेक शिक्षक, मार्गदर्शक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभात रंजन शाही की रिपोर्ट