पटना : राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाजार का आज समापन हो गया। 22 दिसंबर से 31 दिसंबर तक चले इस दस दिवसीय आयोजन में बिक्री का आंकड़ा डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। वर्ष के अंतिम दिन मौसम के अनुकूल होने और बच्चों की छुट्टियों के कारण गांधी मैदान में भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दराज से आए खरीददारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जिससे मेला पूरी तरह गुलजार रहा।
इस बार राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाजार की व्यवस्थाओं की सर्वत्र सराहना हुई। मुख्य द्वार से लेकर मंच और स्टॉल की साज-सज्जा, साफ-सफाई तथा उपलब्ध सुविधाओं ने आगंतुकों का मन मोह लिया। प्रतिदिन शाम पांच बजे आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विविधता ने मेले की आकर्षण को और बढ़ाया। शाम चार बजे से ही दर्शक दीर्घा की कुर्सियां भरने लगती थीं। उद्यमियों, दर्शकों और खरीददारों ने मेले की बेहतर व्यवस्था और सुनियोजित संचालन की खुले दिल से प्रशंसा की।
मेले के समापन अवसर पर कठिन मौसम और कड़ाके की ठंड के बावजूद लगातार दस दिनों तक अपने स्टॉल पर डटे रहकर उत्पादों की बिक्री करने वाले उद्यमियों को मेला प्रबंधन की ओर से प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक श्री अशोक कुमार सिन्हा एवं भारतीय वस्त्र मंत्रालय के सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) श्री मुकेश कुमार ने उद्यमियों के बीच प्रमाणपत्र वितरित किए। उद्यमियों ने मेला प्रबंधन के प्रति आभार जताते हुए भविष्य में भी बिहार संग्रहालय द्वारा ऐसे ही उत्कृष्ट आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की।
समापन दिवस की सांस्कृतिक संध्या में राजधानी के लघुकथाकारों ने विशेष प्रस्तुति दी। गांधी मैदान में आयोजित लघुकथा पाठ के माध्यम से साहित्यकारों ने वर्ष 2025 को भावपूर्ण विदाई दी। अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच द्वारा आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता ‘नई धारा’ के संपादक प्रोफेसर डॉ. शिवनारायण ने की।
इस अवसर पर विभा रानी श्रीवास्तव, डॉ. अनीता राकेश, पूनम कतरियार, डॉ. ध्रुव कुमार, वीरेंद्र भारद्वाज, आलोक चोपड़ा, सुमन कुमार, अनिल रश्मि, डॉ. रमेश कुमार, नीरजा कृष्णा, सिद्धेश्वर, सम्राट समीर, सीमा रानी, राज कांता सिंह सहित तीन दर्जन से अधिक लघुकथाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन सीमा रानी ने किया।
लघुकथा सत्र से पूर्व बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के संयोजक डॉ. ध्रुव कुमार एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिवनारायण का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। कुल मिलाकर राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाजार का यह आयोजन शिल्प, संस्कृति और साहित्य का संगम बनकर यादगार साबित हुआ।
प्रभात रंजन शाही की रिपोर्ट