दरभंगा से एक रुह कंपा देने वाली घटना सामने आयी है जहां न्याय नहीं मिलने पर बेटे की मौत के तीन महीने बाद मां ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। यहां तीन महीने पहले एक निजी स्कूल में रहस्यमयी हालातों में एक नौ वर्षीय बच्चे की जान चली गई थी। बच्चे की संदिग्ध हालात में मौत के बाद उसकी मां इंसाफ के लिए दर—दर भटकती रही। बेटे की मौत की जांच और इंसाफ के लिए महीनों तक इंतजार करने के बाद वह आखिर टूट गई और खुद भी जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह दर्दनाक वाकया दरभंगा के लहेरियासराय में बीते दिन पेश आया। मृतका की पहचान मनीषा देवी के रूप में हुई है। मृतक के भाई शिवशंकर कुमार ने बताया कि मनीषा ने तीन महीने पूर्व अपने 9 वर्षीय बेटे कश्यप का लहेरियासराय के एक निजी स्कूल में दूसरी कक्षा में नामांकन कराया था।
जानकारी के अनुसार मृतका का पुत्र कश्यप स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। उसे अभी स्कूल ज्वाइन किए 19 दिन ही हुए थे कि 20वें दिन उसका शव स्कूल के बाथरूम की खिड़की में लगे फंदे से लटका मिला। जानकारी होने के बाद परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। लेकिन पुलिस की तरफ से कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। बेटे की मौत से आहत मनीषा लगातार पुलिस थाना और अधिकारी के कार्यालय का चक्कर लगाती रही। लेकिन जांच में कुछ भी सामने नहीं आया।
मृतका के भाई शिवशंकर कुमार ने बताया कि महिला थाना जाती रही, लेकिन पुलिस के द्वारा उसे कार्रवाई के बदले डांट लगायी जाती थी। इकलौते बेटे की मौत का सदमा और ऊपर से पुलिस के रवैये से वह हताश हो गई और उसने पुत्र की मौत के तीन माह बाद बीते दिन की सुबह सल्फास खा लिया। उसकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टर ने उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। लेकिन वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। महिला की आत्महत्या के बाद मौके पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। परिजन अपनी मांग पर टिके हुए हैं और पुलिस भारी दबाव में है क्योंकि अब उसके सामने दो-दो घटनाओं को सुलझाने की चुनौती है। इधर, परिजन से मिलने पहुंचे वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश साहनी ने कहा कि इस सरकार में गरीब लोगों को न्याय की उम्मीद छोड़ ही देना चाहिए। यदि प्रशासन सही समय से जांच कर स्कूल पर कार्रवाई की रहती तो आज मनीषा जिंदा होती।