सहरसा में विजिलेंस टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिक्री कर विभाग के एक चपरासी को 75 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचा है। गिरफ्तार चपरासी की पहचान शंकर कुमार के रूप में हुई है जिसे घूस के 75 हजार रुपए के साथ पकड़ा गया। चपरासी का कहना है कि उसने यह रिश्वत वाणिज्य कर आयुक्त प्रवीण कुमार के कहने पर ली थी। अधिकारियों के अनुसार शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वाणिज्य कर आयुक्त प्रवीण कुमार ने उनका खाता होल्ड कर दिया था। मामले के निपटारे के लिए उनके द्वारा उससे 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। जिसके बाद 75 हजार रुपए पर फसइनल डील तय हुई। पटना ब्यूरो ने सबसे पहले परिवादी की शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के क्रम में रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सही पाई गई। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद ब्यूरो ने एक धावा दल का गठन किया और उसके बाद जाल बिछाकर चपरासी को दबोचा गया।
जानकारी के अनुसार विजिलेंस की इस कार्रवाई से सहरसा के प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया। धावा दल ने कार्रवाई करते हुए आरोपी शंकर को 75 हजार रुपए लेते रंगे-हाथ गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि ये रिश्वत वह वाणिज्य-कर आयुक्त प्रवीण कुमार के कहने पर लेने गया था। पूछताछ में पता चला कि सिमरी बख्तियारपुर के टायर व्यवसायी सिराजी होदा का GST अकाउंट से होल्ड हटाने की एवज में वाणिज्य-कर के संयुक्त आयुक्त प्रवीण कुमार के द्वारा एक लाख रुपया मांगा गया था। इसके लिए कार्यालय चपरासी शंकर कुमार से उसे मिलने को कहा गया था। इसी के बाद शिकायत के आधार पर निगरानी टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही चपरासी ने रिश्वत के पैसे थामे, उसे दबोच लिया गया।
इधर गिरफ्तारी के बाद आरोपी चपरासी शंकर को निगरानी टीम पूछताछ के लिए सहरसा परिसदन लायी। इसके बाद उसे निगरानी टीम अपने साथ पटना लेकर चली गई। वहीं गिरफ्तार कार्यालय चपरासी शंकर कुमार ने स्पष्ट बताया कि कैसे उसने वाणिज्य कर आयुक्त प्रवीण कुमार के लिये 75 हजार रुपैया लिये। इस दौरान उसने खुद को निर्दोष बताया।अभियुक्त को पूछताछ के बाद पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। ब्यूरो के सूत्रों ने बताया कि चपरासी के बयान के आधार पर संबंधित वाणिज्य कर आयुक्त प्रवीण कुमार के खिलाफ भी जांच शुरू की गई है। पुख्ता सबूत मिलने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।