नवादा : जिले के कौआकोल स्थित जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित प्रसिद्ध सेखोदेवरा आश्रम में 28 से 30 दिसंबर तक तीन दिवसीय साहित्य समागम आयोजित की गई है, जिसमें देश भर के कई राज्यों और विदेश में हिंदी की सेवा कर रहे साहित्यकारों का जुटान होगा। मौके पर पहुंचने वाले देश-विदेश के 61साहित्यकारों को अशोक स्मृति संस्थान के द्वारा राम रतन प्रसाद सिंह रत्नाकर स्मृति सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। बता दें अशोक स्मृति संस्थान हिसुआ के द्वारा लेख्य मंजूषा, मगध साहित्य प्रेरणा मंच तथा नवोत्साह के सहयोग से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम विशुद्ध रूप से साहित्यिक कार्यक्रम होगा।
जिसमे कवि सम्मेलन, सेमिनार, शोध पत्र प्रस्तुतिकरण, लघु कथा वाचन, कहानी सहित साहित्यिक विधा से जुड़े सत्र आयोजित होंगे। कार्यक्रम के संयोजक कवि ओंकार शर्मा कश्यप,अध्यक्ष जितेंद्र राज आर्यन, स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि अपने लेखकीय श्रम से साहित्याकाश को दीप्त करने में लगे भारत वर्ष के कवि,लेखक, संपादक सहित अन्य विधा के साहित्यकारों को 48 घंटे के लिए एक आंगन में लाने के लिए एक प्रयास हो रहा है।
देश विदेश की साहित्य संपदा में मगध के प्राचीन और ऐतिहासिक स्थलों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसी परंपरा को जीवंत रखने के लिए मगध के अलग-अलग स्थानों पर हर साल देश-विदेश के साहित्यकारों का जुटान होता है। वरिष्ठ साहित्यकार राजेश मंझवेकर ने बताया कि आयोजन की विशेष बात यह है कि मगध के बड़े साहित्यिक पुरोधा रहे स्व रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर की स्मृति में 61 साहित्यकारों को स्व रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर स्मृति सम्मान ‘ से सम्मानित किया जाएगा। स्व रत्नाकर जी हम साहित्य साधकों के प्रेरणा पुंज हैं और उनकी कृपा सदियों तक फलित होती रहेगी।
साहित्य में मगध और बिहार को विस्तृत करना उद्देश्य
आयोजन समिति से जुड़े प्रदेश अध्यक्ष उत्पल भारद्वाज ने बताया कि इस ऐतिहासिक भूमि पर साहित्यिक आयोजन का उद्देश्य भारत के आधुनिक साहित्याकाश में मगध सहित बिहार का प्रतिभाग विस्तृत करना और लेखन में बिहारी सामग्री का समावेश कराना है।
स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संपूर्ण क्रांति के महत्वपूर्ण साक्षी स्थल तथा वर्तमान परिदृश्य में ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने में सतत कार्यरत सर्वोदय आश्रम के रज कण को छूकर देश भर के हजारों साहित्यकार न सिर्फ गौरव बालवीर गौरवान्वित महसूस करेंगे, बल्कि उनकी लेखनी बिहार और बिहारी संस्कृति, सभ्यता की ओर अग्रसर होगी। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए साहित्यकार गौतम सरगम, डॉ शैलेंद्र प्रसून, देवेंद्र विश्वकर्मा, अभाविप नेता और संस्थान के उपाध्यक्ष रौशन सिंह वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष विवेक कुमार सिंह आदि लगे हैं।
भईया जी की रिपोर्ट