नवादा : जनसुराज के प्रवक्ता सैय्यद मसीहउद्दीन ने कहा है कि क्रिसमस के मौके पर देश के की स्थानों पर चर्चों पर हमला देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। संविधान में सभी को अपने अपने इच्छानुसार धर्म चुनने का अधिकार है। ऐसे में इस प्रकार के हमले से देश की संप्रभुता पर खतरा उत्पन्न होने की संभावना है।
इसके पूर्व उन्होंने क्रिसमस के पावन अवसर पर हसुआ-नवादा पथ पर अवस्थित इंदिरा नगर में एलिस चर्च द्वारा आयोजित क्रिसमस समारोह में शामिल हुये जिस में भारी संख्या में लोग मौजूद थे जिन्हें मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि क्रिसमस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के लिए आशा, करुणा और प्रेम का उत्सव है। यह वह दिन है जब ईसा मसीह का जन्म हुआ—एक ऐसे महापुरुष का, जिनका जीवन और विचार आज भी दुनिया को मानवीय मूल्यों की याद दिलाता है।
ईसा मसीह का संदेश अत्यंत सरल और सार्वकालिक था—प्रेम करो, क्षमा करो, और शांति का मार्ग अपनाओ। उन्होंने हिंसा के बदले करुणा, प्रतिशोध के बदले क्षमा और घृणा के बदले प्रेम को चुना। “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो”—यह वाक्य केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि सभ्य समाज की बुनियाद है। उनके लिए हर मनुष्य समान था—गरीब, बीमार, पीड़ित और हाशिए पर खड़ा व्यक्ति उनकी करुणा के केंद्र में था।
आज जब देश और दुनिया के ईसाई समुदाय गिरजाघरों में प्रार्थना कर रहे थे, गीत गा रहे थे, मोमबत्तियाँ जला रहे थे और शांति की कामना कर रहे थे, उसी समय देश के कई हिस्सों से क्रिसमस समारोहों पर हमलों की खबरें सामने आईं। कहीं प्रार्थना सभाएँ बाधित की गईं, कहीं भय का माहौल बनाया गया, तो कहीं आस्था के प्रतीकों को निशाना बनाया गया। यह घटनाएँ केवल किसी एक समुदाय पर हमला नहीं हैं—ये भारत की साझी संस्कृति, उसकी सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों पर चोट हैं।
भारत की पहचान विविधता में एकता से है। यहाँ त्योहार केवल किसी एक धर्म के नहीं होते—वे समाज के साझा उत्सव होते हैं। क्रिसमस भी ऐसा ही पर्व है, जिसे हर धर्म और वर्ग के लोग खुशी और अपनत्व के साथ मनाते आए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसा, भय या नफ़रत—ईसा मसीह के संदेशों के ठीक विपरीत है और भारत की आत्मा के भी।
आज आवश्यकता है कि हम ईसा मसीह के विचारों को केवल स्मरण न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारें। प्रेम का उत्तर प्रेम से, घृणा का उत्तर करुणा से और हिंसा का उत्तर शांति से—यही क्रिसमस की सच्ची भावना है। राज्य और समाज—दोनों की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को अपनी आस्था के साथ शांतिपूर्वक जीने का अधिकार मिले, और किसी भी प्रकार की असहिष्णुता को सख्ती से रोका जाए। क्रिसमस हमें याद दिलाता है कि अँधेरे के बीच भी आशा का दीप जलाया जा सकता है। आइए, इस क्रिसमस पर हम संकल्प लें नफ़रत के शोर में प्रेम की आवाज़ को और ऊँचा करेंगे। यही ईसा मसीह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भईया जी की रिपोर्ट