– न्यायालय की शरण में जाने की थी चेतावनी
नवादा : जिले के व्यवहार न्यायालय जिला अधिवक्ता तदर्थ कमिटी के व्यवहार से अधिवक्ताओं में रोष गहराता जा रहा है। अब तो अधिवक्ताओं ने न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी तक दे रहे हैं। ताज़ा मामला आय-व्यय से जुड़ा है। आय-व्यय से जुड़े हिसाब अधिवक्ताओं की बैठक में न देकर व्यवहार न्यायालय के गेट के बाहर बगैर किसी हस्ताक्षर के चिपकाये जाने से अधिवक्ता विफर पड़े हैं।
बतौर अधिवक्ता अवलोक कुमार का मानना है कि जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य होने के नाते महत्वपूर्ण जानकारी लेना हमारा कानूनी अधिकार है तथा कर्त्तव्य भी है । संघ का आमदनी बढ़ने के बजाय घाटे में कैसे पहुंच गया ? अगर संघ का आमदनी घाटे में जा रहा था तो संघ के सम्मानित सदस्यगण को इतनी महत्वपूर्ण जानकारी क्यों नहीं दी गयी ? छुपा कर क्यों रखा गया ? आय व्यय का ब्योरा संघ की मासिक बैठक बुलाकर पेश क्यों नहीं किया गया ? इसका क्या कारण है ?
इस तरह मनगढ़ंत ब्योरा किस आधार पर कोर्ट के मुख्य गेट पर चिपका दिया गया । इस प्रकार बिहार राज्य अधिवक्ता संघ के महत्वपूर्ण दिशा निर्देश/गाइडलाइन /आदेश का सीधा सीधा उल्लंघन किया जा रहा है जिससे वित्तीय अनिमितता होने का साफ-साफ संभावना दिखाई पड़ती है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकत।
जिला अधिवक्ता संघ किसी का व्यक्तिगत संपति नहीं है जो कोई भी संघ के महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर मनमानी करते रहें। मैं हाथ पर हाथ रखकर संघ के सदस्य होने के नाते पैसे को लुटते हुए नहीं देख सकता । यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा । इसके लिए जो भी कानूनी लड़ाई लड़ना पड़ेगा लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं ।
मेरा भी व्यक्तिगत पैसा अधिवक्ताहित के लिए संघ के खाता में जाता है । मैं भी न्यायिक कार्यों के लिए संघ के द्वारा उपयोग किए जाने वाले हस्ताक्षर युक्त दस्तावेजों को प्रतिदिन खरीदता हूं जिससे संघ को आर्थिक लाभ पहुंचता है। सम्मानित अधिवक्तागण को ध्यान आकर्षण करना चाहते हैं कि जिस समय तदर्थ कमिटी का गठन हुआ था पुरानी मूल्यों के अनुसार न्यायिक कार्यों में उपयोग लाने के लिए दस्तावेज बेची जा रही थी।
2 माह के आमदनी में संघ को अच्छी खासी आमदनी दिखाया गया था जो की तदर्थ कमिटी के पदाधिकारीगण घूम घूम कर अपने मुंह से बड़ाई करते नहीं थकते थे संघ की आमदनी बढ़ गई है । 2 माह के बाद और संघ के द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में जिस दिन से मानमाने तरीके से दाम बढ़ा देने के बावजूद साल के अंतिम न्यायिक कार्य दिवस के अवसर पर आय व्यय का ब्योरा केवल मुख्य गेट पर चिपका देना और और इतने दिनों से आय व्यय का ब्योरा पेश नहीं करना क्या दर्शाता है।
एक भी बैठक नहीं करना और संघ में वित्तीय घाटे के बारे में सम्मानित अधिवक्तागण को महत्वपूर्ण जनकारी नहीं देना तथा छुपा कर रखना तदर्थ कमेटी के क्रियाकलापों को देखते हुए अधिवक्ताहीत में न्याय संगत नहीं है। इसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से सही सही जानकारी अधिवक्ता हित में प्राप्त करने के लिए तदर्थ कमिटी के माननीय अध्यक्ष/महासचिव महोदय से तथ्यामक लिखित बाते रखेंगे और तथ्यात्मक साक्ष्य के साथ लिखित जवाब भी मांगेगे।
संघ में हो रहे वित्तीय घाटे के बारे में विस्तृत सारी जानकारी हासिल करना चाहेंगे । मुझे जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य होने के नाते बिहार राज्य अधिवक्ता संघ के दिशा निर्देश तथा आदेशों के तहत सारी कानूनी अधिकार हमें भी प्राप्त है । ऐसे में आवश्यक हुआ तो न्यायालय का शरण लिया जायेगा।
भईया जी की रिपोर्ट