कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता सुमन कुमार मल्लिक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब तक अपनी राजनीतिक चरित्र में बदलाव नहीं लाएगी तब तक उसकी सत्ता में वापसी संभव नहीं हैं। कांग्रेस द्वारा अपनी हार के लिये सिर्फ भाजपा को दोषी बतलाना हास्यास्पद हैं। गलत संगठनात्मक नीति, समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कुछ विशेष चेहरों को ही सभी अवसर देने की नीतियों के कारण ही कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मतदाताओं के नज़र से उतरती जा रही हैं।
आगे उन्होंने कहा कि भाजपा का आला नेतृत्व अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के हित को ईमानदारी से समझते हुए उसे प्राथमिक्ता के आधार पर निर्णय लेता हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी हैं और इसके नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को ही सदैव मौका दिया हैं। बात चाहें, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने हेतु नितिन नबीन जी, दिल्ली में मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जी व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी की हो, इनके बनने की चर्चा पहले पूर्व में कोई नहीं जानता था और ये सभी भाजपा के साधारण से जमीनी कार्यकर्त्ता थे। किन्तु कांग्रेस पार्टी में एक ही चेहरा मुख्यमंत्री, राज्यसभा व विधान परिषद् जाता हैं और फ़िर उसे ही संगठन में जगह मिलता हैं, यह पार्टी का सभी कार्यकर्ता जानता हैं तथा ये पहले से तय ही रहता हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी मजबूत जनाधार वाले समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर थके-हारे लोगों को ही रिपीट करती रहती हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार विधान सभा से तुरन्त पहले दिल्ली नेतृत्व ने बेहद मजबूत और वोटों पर पकड़ रखने वाले तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह को हटा कर निहायत कमज़ोर प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करने का विवेकहीन निर्णय लिया। राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रभारियों के तांडव ने पार्टी की ऐसी दुर्दसा कर दिया जिसके कारण पार्टी की भद पीट गई, इसके बाद भी कांग्रेस आलाकमान अपनी नीतियों पर बदलाव करती नही दिख रही हैं। श्री मल्लिक ने कहा की यदि कांग्रेस पार्टी देश और सूबों में अपनी दमदार वापसी चाहती हैं तो आलाकमान को बीजेपी की तरह अपने संगठन में चेहरों को नही बल्कि मजबूत नीतियों और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे लाना होगा और उन्हें ही विशेष अवसर देने का निर्णय लेने की शुरुआत करनी होगी।