नवादा : जिले के बिहार -झारखंड सीमा क्षेत्र के रजौली वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल माफियाओं के विरुद्ध बड़ी कामयाबी हासिल की है। खैर लकड़ी तस्कर जंगल के अंधेरे का लाभ उठाकर प्राकृतिक संपदा की चोरी कर रहे थे, तभी वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर भारी मात्रा में खैर की लकड़ी के साथ पांच तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई में एक मिनी ट्रक और तस्करी में इस्तेमाल होने वाली एक मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया। डीएफओ श्रेष्ठ कृष्ण ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन बुढ़ियासाख जंगल के भीतर चलाया।
विभाग को सटीक सूचना मिली थी कि तस्करों का एक गिरोह बुढ़ियासाख के घने जंगलों से खैर की कीमती लकड़ियों को काटकर ट्रक में लोड कर रहा है। सूचना मिलते ही वनों के क्षेत्रीय पदाधिकारी नारायण लाल सेवक के नेतृत्व में फॉरेस्टर आदर्श कुमार के सहयोग से छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने रात नौ बजे मौके पर धावा बोलने पर पाया कि मिनी ट्रक में खैर की लकड़ियों की लोडिंग चल रही है। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से बुढ़ियासाख से सवैयाटांड़ जाने वाले जंगली रास्ते की घेराबंदी की और अशोक लेलैंड कंपनी के मिनी ट्रक संख्या यूपी 32 यूएन 2609 को कीमती लकड़ी के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।
45 पीस खैर का बोटा बरामद
वन विभाग द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, मौके से खैर की लकड़ी के कुल 45 बोटे बरामद किये गये हैं, जिनका कुल वजन लगभग 15 क्विंटल आंका गया है। इसके अलावा अधिकारियों ने मौके से एक मोटरसाइकिल जब्त किया है। बताया जाता है कि तस्कर बाइक का उपयोग जंगल के दुर्गम रास्तों पर रेकी करने और आवाजाही के लिए करते थे।15 क्विंटल खैर की लकड़ी की बाजार कीमत दो लाख से अधिक बतायी जा रही है।
पकड़े गये तस्करों का अंतरराज्यीय कनेक्शन
छापेमारी के दौरान वन विभाग ने जिन पांच लोगों को दबोचा है, उनमें स्थानीय माफियाओं के साथ उत्तर प्रदेश के लोग भी शामिल हैं। गिरफ्तार किये गये लोगों में नवादा के इस्लामनगर निवासी शमसुद्दीन खान के पुत्र शौकत खान और जुबेर आलम के पुत्र इंतेखाब आलम के साथ-साथ रजौली थाना क्षेत्र के फरका बुजुर्ग निवासी बिंदा राजवंशी का पुत्र विवेकानंद राजवंशी शामिल है।
वहीं, अंतरराज्यीय तस्कर के रूप में यूपी के प्रतापगढ़ जिला अंतर्गत रामगंज पुरानी बाजार गांव निवासी मो फारुख के पुत्र लतीफ अहमद और ट्रक चालक उत्तर प्रदेश अमेठी जिले के जगदीशपुर थाना अंतर्गत खैरियतपुर गांव निवासी हमीदुल्लाह के पुत्र पीर मोहम्मद को भी गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट हो गया है कि रजौली के जंगलों से लकड़ियों की तस्करी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है।
खैर की लकड़ी की तस्करी और पर्यावरण पर संकट
खैर की लकड़ियों की तस्करी का मुख्य कारण इसका कत्था उद्योग में भारी उपयोग होना है। बाजार में इसकी ऊंची कीमत होने की वजह से तस्कर जान जोखिम में डालकर संरक्षित वन क्षेत्रों में घुसपैठ करते हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह की अंधाधुंध कटाई से रजौली के जंगलों का घनत्व कम हो रहा है, जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है और भूजल स्तर पर बुरा असर पड़ रहा है।
इसके अलावा मशीनों और ट्रकों के शोर से हिरण, जंगली सुअर, लोमड़ी और भालुओं के स्वभाव में आक्रामकता देखी जा रही है, जो भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा कारण बन सकता है। रजौली का यह इलाका खैर के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इनकी अवैध कटाई से क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है। खैर की लकड़ी की तस्करी मुख्य रूप से कत्था बनाने के लिए की जाती है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
डीएफओ ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जंगल की संपदा को नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है । पेड़ों की इस तरह कटाई से न केवल वन क्षेत्र घट रहा है, बल्कि जंगली जीवों के प्राकृतिक आवास पर भी खतरा मंडरा रहा है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि इस खेप को उत्तर प्रदेश के किस ठिकाने पर भेजा जाना था। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा और पकड़े गये आरोपितों पर वन अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की जायेगी, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर लगाम लगायी जा सके।
भईया जी की रिपोर्ट