नवादा : जिला समाहरणालय में फर्जी कार्यालय का भंडाफोड़ के बाद अब एक नया मामला सामने आया है। मनरेगा लोकपाल कार्यालय को डीएम ने इतना उपेक्षित कर दिया है कि शिकायत कर्ता वहां जाने तक से परहेज़ करने लगे हैं। हाल यह है कि एक छोटे से कमरे में संचालित कार्यालय में आगंतुकों को बैठने के लिए एक टूल तक नहीं है। और तो और कार्यालय के लिए लिपिक व आदेशपाल तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा है।
मनरेगा लोकपाल को डीएम व डीडीसी तक को नोटिस करने का अधिकार है। ऐसे में डीएम नहीं चाहते कि उन्हें कोई उनके अधिकारों को चुनौती दे। यही कारण है कि मनरेगा लोकपाल बैठकर बगैर कोई का र्य के वेतन प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में कार्यालय की दुर्दशा देख जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल हतप्रभ रह गये। उन्होंने कार्यालय की दुर्दशा को कैमरे में क़ैद किया। इतना कर व शांत नहीं हुये और इसकी शिकायत उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा संचालित पीएम ओपीजी से करते हुए जांच के साथ संबंधित दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
भईया जी की रिपोर्ट